क़ानूनी अधिकार जो हर महिला को पता होने चाहिए

आज के समय में नारी पुरुषो से कंधे से कन्धा मिला कर चल रही है, फिर भी देखा जाता है हर क्षेत्र में महिला उत्पीड़न देखने को मिलता है इसमें रोक लगाने के लिए सरकार ने महिलाओ की सहायता के लिए कुछ कानून बनाए है किन्तु जानकारी के आभाव में महिलाए उनका लाभ नहीं ले पाती |

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          आज की कड़ी में हम बात करेंगे  कुछ ऐसे ही क़ानूनी अधिकारों के बारे में जिनके बारे में महिलाओ को जानकारी होनी ही चाहिए |

  • समान वेतन का अधिकार- अगर कोई पुरुष व महिला एक समान ही कार्य करते है तो उन्हें समान वेतन प्राप्त करने का पूरा अधिकार है ऐसा न करने कंपनी के ऊपर केस किया जा सकता है |

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  •        घरेलु हिंसा के खिलाफ आवाज उठाने का अधिकार हर महिला को घरेलु हिंसा के खिलाफ आवाज उठाने का अधिकार है इसके अंतरगर्त किसी भी महिला शारीरिक या मानसिक रूप से प्रताड़ित करना शामिल है किसी भी महिला को उसके इच्छा के विरुद्ध कोई काम करने को मजबूर नहीं किया जा सकता चाहे उसे घर में कैद करना हो या समाज के नाम पे उससे जीने की आजादी छीनना हो हर महिला को इसके खिलाफ आवाज उठाने का हक़ है |

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  •              संपत्ति पर अधिकार- हिन्दू धर्म के अनुसार पुरुष हो या महिला उसका उसके पिता की संपत्ति में पूरा अधिकार है, और कोई भी अगर उसका हक़ छीने तो उसके खिलाफ आवाज उठा सकती है |

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  •             गरिमा और शालीनता का अधिकार इस अधिकार के तहत अगर किसी महिला को किसी भी मामले में हिरासत में लिया जाता है तो उसके साथ किसी भी तरह की पूछताछ महिला ही कर सकती है। साथ ही साथ रात्रि में किसी महिला को अरेस्ट भी नहीं किया जा सकता हालांकि विशेष परिस्थिति में मजिस्ट्रेट का आदेश आने के बाद ही गिरफ्तारी हो सकती है, किन्तु साथ में महिला पुलिस का होना अनिवार्य है |

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  •            पहचान छुपाने का अधिकार – अगर किसी महिला के साथ किसी तरह की छेड़छाड़ या बलात्कार की स्थिति आती है तो उसे अपनी पहचान छुपाने का पूरा अधिकार प्राप्त है और अगर कोई उसकी पहचान उजागर करता है तो वो उसके खिलाफ एक्शन लेने का उसे पूरा अधिकार है |

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  •            मातृत्व अवकाश लेने का अधिकार यह अधिकार काम करने वाली महिलाओं के लिये बनाया गया है। जिसमें डिलीवरी होने के 12 सप्ताह तक महिला को छुट्टी दी जाती है और उसके वेतन में कटौती नहीं की जाती है।और कोई भी उसके इस अधिकार को छीन नहीं सकता |

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  •           सबंधो से इंकार करने का अधिकार कोई भी महिला चाहे वो आपकी पत्नी हो,लिव इन पार्टनर हो या गर्लफ्रेंड कोई उससे उसकी मर्जी के बिना सम्बन्ध बनाने को बाध्य नहीं कर सकता और अगर कोई ऐसा करता है तो ये बलात्कार के अंदर आता है इसलिए औरत की ना का सम्मान करते हुए जबरजस्ती नहीं की जा सकती |

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  •           कन्या भ्रूण हत्या के खिलाफ अधिका-भारत के हर नागरिक का ये कर्तव्य है कि वो एक महिला को उसके मूल अधिकार- ‘जीने के अधिकार’ का अनुभव करने दें. गर्भाधान और प्रसव से पूर्व पहचान करने की तकनीक(लिंग चयन पर रोक) अधिनियम कन्या भ्रूण हत्या के खिलाफ अधिकार देता है |

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  •           काम पर हुए उत्पीड़न के खिलाफ अधिकारकाम पर हुए यौन उत्पीड़न अधिनियम के अनुसार आपको यौन उत्पीड़न के खिलाफ शिकायत दर्ज करने का पूरा अधिकार है अगर वर्क प्लेस पर आपके साथ किसी तरह की बत्तमीजी हुई है तो उसके खिलाफ आवाज उठाने का आपको पूरा अधिकार है |

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