शिरडी के साई बाबा | Sai Baba miracle stories

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महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले में एक गांव है शिरडी | शायद ही कोई ऐसा हो जिसने इस जगह का नाम न सुना हो | शिरडी का नाम सुनते ही जेहन में सबसे पहले जो चीज आती है वो है साईं | किसी के लिए वो भगवान है, किसी के लिए धर्म गुरु, किसी के लिए उसका सब कुछ | बाबा ने खुद कहा है जो मन में जैसा भाव रखेगा मुझे उसी रूप में अपने पास पाएगा |

अपने भक्तो की तकलीफ दूर करने के लिए बाबा आज भी शिरडी में निवास करते है और आए दिन अपने चमत्कारो से भक्तो के दुखो को दूर करते है, इसीलिए यहाँ आने वाले श्रध्हलुओ की संख्या में निरंतर बढ़ोत्तरी हो रही है |

आम जनता को एकता और प्रेम का पाढ़ पढ़ाने बाबा ने शिरडी में अवतार लिए उनके दो ही वचन है –  श्रद्धा और सबुरी, जो ईश्वर के प्रति विश्वास को बढ़ाने और सब्र को जगाने का काम करते है |shraddha-saburi

 

प्रारंभिक जीवन – साईं बाबा के जीवन को लेकर उनके भक्त अनेक मतों में बटे है, कोई कहता है वो मुस्लिम परिवार से थे, कोई उनमे श्री कृष्णा की छवि देखता है वो कहा जन्मे कहा से आए ये आज भी मतभेद है |  मान्यता है १६ वर्ष की उम्र में सबसे पहले उन्हें शिरडी गांव में नीम के पेड़ के नीचे ध्यान करते हुए महालसापति जी ने देखा जो गांव के मंदिर के पुजारी थे और उन्हें साईं नाम दिया |

शिरडी के पाटिल की पत्नी बायजा जिन्होंने उन्हें अपना बेटा माना और इसी तरह अपने चमत्कारों प्रेम और सेवा भावना से इस बाल योगी ने शिरडी वासियो के जीवन में एक विशेष स्थान बना लिया |

रहन सहन – साईं बाबा का रहन सहन एक योगी की तरह ही था | वो गांव के बाहर एक टूटी फूटी मस्जिद में रहते थे, जिसे वो द्वारका माई कहते थे तथा भिक्षा मांग कर अपना जीवन यापन करते थे | साईं के कई अनुयायी बने, वे चाहते थे बाबा भिक्षा न मांगे तथा उनकी जरुरत का सारा इंतजाम खुद अनुयायियों ने करना चाहा पर साईं ने इसे कभी स्वीकार नहीं किया | वो तामसिक मोह माया से दूर रहते थे, उनका मानना था संत को भिक्षा मांग कर ही जीवन यापन करना चाहिए |

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साईं के चमत्कार– साईं ने अपने जीवन काल में बहुत से चमत्कार किए है उनमे से कुछ है –

  • पानी से दीये जलाना – एक बार दिवाली में गांव के एक व्यापारी ने उन्हें दीये जलाने को तेल नहीं दीये तो अपने भक्तो का विश्वास रखने के लिए उन्होंने तेल की जगह पानी से दीये जला दिए |
  • माहमारी से शिरडी को बचाना – एक समय पुरे महाराष्ट्र में हैजा फ़ैल गया था जिसमे कई लोग मारे गए थे तब बाबा ने आटे से शिरडी की सीमा पे रेखा खींच थी और वो महामारी शिरडी निवासिओं को कोई नुकसान नहीं पंहुचा पाई |
  • चाँद भाई की घोड़ी का पता लगाना – एक बार एक राहगीर अपनी घोड़ी के घूम जाने से बहुत दुखी था तब बाबा ने आवाज देकर उसकी घोड़ी को उससे मिलवा दिया |
  • क्षय रोग– इस रोग का उपचार एक कुष्ठ रोगी जिसे उसके ही परिवार ने त्याग दिया था उसे अपना कम्बल ओढ़ा कर उसकी व्याधि दूर की |
  • विट्ठल रूप के दर्शन – एक संत ने बाबा को फ़क़ीर मान उनकी परीक्षा लेनी चाही उन्हें अपने विट्ठल रूप में दर्शन दे उनकी शंका का समाधान किया |

ऐसी ही कई कहानियाँ है, जो साईं चमत्कारों से भरी है


साई के दर्शन के लिए शिरडी तक कैसे पहुंचे

शिरडी रेलवे रूट से जुड़ा हुआ है,  हलाकि बहुत काम ही ट्रैन है जो शिरडी साईनगर रेलवे स्टेशन तक आती है | इसके अलावा शिरडी का सबसे निकटतम स्टेशन है कोपरगांव | यहाँ जाने के लिए आपको भारत के सभी प्रमुख शहरों से ट्रेन मिल जाएंगी या मनमाड स्टेशन उतर के भी शिरडी पंहुचा जा सकता है | स्टेशन से शिरडी जाने के लिए बहुत से साधन उपलब्ध रहते है इस तरह शिरडी पहुंचना बहुत ही आसान है |

शिरडी में देखने लायक स्थान

 साईं की शिरडी में बहुत से स्थान है जो घुमने लायक है –

  • समाधी मंदिर – जहाँ बाबा की समाधी है तथा बाबा की मनमोहक मूर्ति विराजमान है |

Sai Baba temple

  • द्वारकामाई – ये वो स्थान है जहाँ बाबा रहते थे, बाबा की जाली धुनि आज भी यहाँ जल रही है |

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  • साईं चावड़ी – द्वारकामाई के पास स्थित साईं चावड़ी वो स्थान है जहा बाबा बैठ कर भक्तो के साथ वक़्त बिताते थे तथा उनकी समस्याओ का समाधान करते थे |

Chavadi-in-Shirdi

  • साईं प्रसादालय – साईं प्रसादालय ऐसा स्थान है जहा अमीर गरीब सब बराबर है ५ रूपए का कूपन कटवा कर यहाँ भर पेट भोजन किया जा सकता है |

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  • साईं वैक्स म्यूजियम – यहाँ साईं के जीवन से प्रेरित कई वैक्स मुर्तिया है जो रियल प्रतीत होती है |

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“सबका मालिक एक है” जैसा ज्ञान देने वाले लोगो में एकता और प्यार का बीज बोने वाले साईनाथ की नगरी में जरूर आए और श्रद्धा और सबुरी का पाठ सीखे |

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