भारत के विकास में बाधक तथ्य

पिछले कई वर्षो में भारत में काफी विकास हुआ कारण और वो निरंतर ही विकास की और अग्रसर कारण बावजूद इसके भारत की गिनती आज भी विकासशील देशो में की जाती कारण आज भी भारत को विकसीत देश होने का दर्जा प्राप्त नहीं हुआ और इसके पीछे सबसे बड़ा कारण है भारत की सामाजिक और आर्थिक स होने का दर्जा प्राप्त नहीं हो पाया है और इसके पीछे सबसे बड़ा कारण है भारत की सामाजिक और आर्थिक चुनौतियां जो भारत के विकास में हमेशा से बाधक रही है |

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आज बात करते है ऐसी ही चुनौतियों के बारे में जो भारत के विकास में बाधक है जैसा की हम सभी जानते है आज का चुनावी मुद्दा ही है सबके साथ सबका विकास क्या ये विकास सच में हो रहा है और वो क्या कारण है जो इसमें बाधा  बन रहे है |

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भारत एक विशाल देश है जहाँ विभिन्न धर्मों, जाति व वेश-भूषा धारण करने वाले लोग निवास करते हैं । दूसरे शब्दों में अनेकता में एकता हमारी पहचान और हमारा गौरव है परंतु अनेकता अनेक समस्याओं की जननी भी है।

 

  • अशिक्षा और निर्धनता -अशिक्षा और निर्धनता भारत के विकास को चुनौती देती सबसे बड़ी समस्या है देश में शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए निरंतर प्रयास किये जा रहे है कई अभियान चलाए जा रहे है जैसे स्कूल चले हम सर्व शिक्षा अभियान जिनके तहत निर्धन वर्ग के छात्रों को मुफ्त में शिक्षा देने का प्रावधान है इसे बढ़ावा देने के लिए माध्यान भोजन यूनिफॉर्म और किताबे प्रदान करने का भी कार्य किया जा रहा है पर जमीनी स्तर पे हक़ीक़त ये है की लोग बच्चो को स्कूल भेजना ही नहीं चाह रहे क्योंकि हक़ीक़त ये है की देश के कई स्कूलों में आज भी प्राथमिक आवश्यकताओं को नजरअंदाज किया जा रहा है शौचालय पीने का पानी भवन जैसी मूलभूत आवस्यकताओ पे ही किसी का ध्यान नहीं है और जहा से साडी व्यवस्थाए है वहाँ शिक्षक मौजूद नहीं जहा मध्यान भोजन की बात की जा रही वहाँ घोटालो की वजह से दूषित और ज़हरीला खाना खा कर बच्चे बीमार पड़ रहे इस स्थिति में देश से अशिक्षा किस प्रकार ख़तम होगी|

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नए रोजगार बनाने और गरीबी को रोकने में सरकार की विफलता की वजह से देहातों से लोगों का शहरों की ओर बड़े पैमाने पर पलायन हो रहा है  निर्धनता को काबू में रख पाना सरकार के लिए चिंता का विषय बना हुआ है |

 

  • भ्रस्टाचार- देश में लगातार बढ़ता भ्रस्टाचार भारत के विकास का सबसे बड़ा रोड़ा है सामान्य कर्मचारी से लेकर ऊँचे-ऊँचे पदों पर आसीन अधिकारी तक सभी भ्रष्टाचार के पर्याय बन गए हैं। जिस देश के नेतागण भ्रष्टाचार में डूबे हुए होंगे तो सामान्य व्यक्ति उससे परे कब तक रह सकता है । यह भ्रष्टाचार का ही परिणाम है कि देश में महँगाई तथा कालाबाजारी के जहर का स्वच्छंद रूप से विस्तार हो रहा है ।बहुत ही उम्मीदों के साथ देश ने लोकपाल बिल की उम्मीदों के साथ नइ सरकार का चयन किया पर यहाँ भी उन्हें धोखा ही हाथ लगा सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे के नेतृत्व में विशाल भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन हुआ लेकिन जन लोकपाल बनाने की मांग को राजनीतिक दलों का व्यापक समर्थन नहीं मिला. पार्टियां अपने को आरटीआई कानून से भी अलग रखना चाहती हैं. भ्रस्टाचार पर नियंत्रण रखने के लिए देश में नोटबेँदी जैसे कड़े फैसले भी लिए गए पर स्थिति सुधरने की जगह और ज्यादा खराब हो गई लोगो ने इसका भी विकल्प तलाश लिया और इसमें देश को ही भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ा |

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  •  जनसँख्या और बेरोजगारी-भारत की लगातार बढ़ती जनसँख्या बेरोजगारी को जन्म दे रही लोग ज्यादा है और उनके अनुपात में नौकरिया बहुत कम नतीजतन एक मास्टर डिग्री वाला व्यक्ति भी १०वी पास व्यक्ति के लिए निकले विज्ञापन में अप्लाई करने पर मजबूर है डॉक्टर इंजीनियर जैसे लोग चपरासी का फॉर्म भर रहे है इससे दयनीय क्या हो सकता है अपने अथक प्रयासों के बावजूद सरकार जनसँख्या वृद्धि पर रोक लगाने में नाकाम रही है और न ही रोजगार के साधन उत्पन्न कर पाई है जिसके चलते देश में प्रतिभावान व्यक्तियों का पलायन जारी है आरक्षण भी इसका एक प्रमुख कारण है आप खुद रिकार्ड्स देख ले दुनिया में सबसे ज़्यादा डॉक्टर इंजीनियर और वैज्ञानिक भारतीय ही है भारत में फैले आरक्षण और बेरोजगारी के चलते वे दूसरे देशो को विकसित करने के लिए काम कर रहे है | जिसका सबसे बड़ा उदाहरण है गूगल सी इ ओ सुन्दर पिचई

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  • आरक्षण- देश के विकास में सबसे बड़ी बढ़ा जो है वो है आरक्षण आप कोई भी विकासशील देश देख लीजिये कही भी आरक्षण का नाम ओ निशान नहीं है क्योंकि हर जगह व्यक्ति द्वारा किये गए काम को उसके नाम से ऊपर रखा जाता है किन्तु हमारे देश में इसके विपरीत नाम का ज्यादा महत्व है एक ऐस टी ऐस सी का बन्दा ४० प्रतिशत लाकर भी देश के प्रशिक्षित संस्थानों में दाखिला लाकर डॉक्टर इंजीनियर और वैज्ञानिक बन जाता है पर वही एक सामान्य वर्ग से आने वाला छात्र ९० प्रतिशत लाकर भी चपराशी का फॉर्म भरने पे मजबूर है तो समझ सकते है देश का विकास किन हाथो में है जहा ९० परसेंट वाला चपराशी और ४० प्रतिशत वाला डॉक्टर है देश में आरक्षण हटाना तो दूर इसपर बात करना तक गुनाह है माना निम्न वर्ग पे अत्याचार हुए है पर उसके लिए देश के विकास के साथ खेलना कहा तक और कब तक सही है और क्या सिर्फ आरक्षण देकर निम्न वर्ग की स्थिति में सुधार हो सकता है कभी नहीं इस तरह तो दोनों वर्गों में दूरिया और बढ़ रही है और कुछ असामाजिक लोग इसका फायदा भी उठा रहे है अतः देश के विकास के लिए आरक्षण पर एक बार फिर से विचार करने की आवश्यकता है |

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  • जातिवाद -जातिवाद हमारे देश की सबसे गंभीर समस्याओ में से एक है लोग जाती धर्म के नाम पर हमेशा आपस में लड़ते रहते है देश में जो भी दंगा फसाद या आगजनी होती है इनमे सबसे प्रमुख कारण जातिवाद और विभिन्न धर्मो के बीच आपसी मनमुटाव देश के विकास में बाधक है कुछ राजनीतिक पार्टिया इन्हे और बढ़ावा देकर राज करती है इसलिए किसी भी परिस्थिति में व्यक्ति को अपना आपा नहीं खोना चाहिए और अपनी समाघ के अनुसार फैसला लेना चाहिए किसी के बहकावे में आकर नहीं |

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  • लैंगिक विषमता- नारी के प्रति अत्याचार, दुराचार तथा बलात्कार का प्रयास हमारे समाज की एक शर्मनाक समस्या है । प्राचीनकाल में जहाँ नारी को देवी तुल्य समझा जाता था आज उसी नारी की भावनाओं को दबाकर रखा जाता है । पुरुष का अह उसे अपने समकक्ष स्थान देने के लिए विरोध करता है ।भारतीय समाज महिलाओं के मुद्दों को किस तरह नजरअंदाज कर रहा है यह इस बात से पता चलता है कि सालों से चल रही बहस के बावजूद महिलाओं के लिए संसद में सीटों के लिए आरक्षण के मुद्दे पर राजनीतिक दलों के बीच सहमति नहीं बन पाई है. कुछ राजनीतिक दल इसका खुलकर विरोध कर रहे हैं जबकि दूसरे अवसरवादी कारणों से इस पर जोर नहीं दे रहे हैं. इतना ही नहीं कोई भी राजनीतिक पार्टी संगठन की संरचना में महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढ़ाने की कोई गंभीर कोशिश नहीं कर रही है. आज भी महिलाए न अपने मर्जी ने पढ़ सकती है काम कर सकती है न कपडे पहन सकती है यहाँ तक की अपनी जिंदगी से जुड़े अहम् फैसले लेने का भी उसे कोई हक़ नहीं है |

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