प्रेरक कहानियाँ

एक समय की बात है दो दोस्त आपस में बहुत प्यार से रहा करते थे उनमे से एक अत्यंत शांत और गंभीर स्वाभाव का था और दूसरा उतना ही मस्तमौला और हमेशा सबसे हसी मजाक करने वाला | उसके चुलबुले स्वाभाव की वजह से कई बार लोग उससे रूठ भी जाया करते क्योंकि वो मजाक करते वक़्त ये भूल जाता की कही उससे किसी का दिल तो नहीं टूट रहा किसी को तकलीफ तो नहीं पहुंच रही | उसके मित्र ने उसे कई बार समझाया पर उसे वो बात समझ नहीं आई और आए दिन वो जाने अनजाने में लोगो को तकलीफ पंहुचा दिया करता |
परिणाम स्वरुप लोगो ने उससे दूरिया बनानी शुरू कर दी शुरुवात में तो उस व्यक्ति की कुछ समझ में नहीं आया किन्तु धीरे धीरे लोगो का व्यवहार उसे आहत करने लगा पर अब भी उसके व्यवहार में कोई खास परिवर्तन नहीं आया अतः अब उसके मित्र ने निर्णय लिया की वो उसे पथ दिखा के रहेगा |
और एक दिन उसके मित्र ने उसे बहुत सी कीले देते हुए कहा की इसे दिवार पर ठोंक दो पर उसने ये कहते हुए इंकार कर दिया की दीवारे ख़राब हो जाएंगी पर अगले पल अपने मित्र पर भरोसा करते हुए उसने सभी कीले दीवार पर गाड़ दी अब मित्र ने कहा की इन कीलो को निकालो क्या दीवार पहले की ही भांति खूबसूरत है अब व्यक्ति को अपने मित्र का आशय समझ आ रहा था मित्र ने उसे समझाते हुए कहा देखो कोई भी रिश्ता ठीक ऐसा ही होता है हमारे द्वारा पहुंचाई गई तकलीफ उनके मन में ठीक वैसा ही घाव देती है जैसा की एक कील किसी दीवार पर और फिर हम चाहे कितनी ही कोशिशे क्यों न कर ले वो रिश्ता पहले की तरह नहीं हो सकता ठीक वैसे ही जैसे दीवार पहले की तरह नहीं हो सकती | अब उसे अपनी मित्र की बात समझ आ चुकी थी और उसने निर्णय लिया की अब वो ऐसा कुछ नहीं करेगा जिससे किसी को तकलीफ पहुंचे | खुद रहीमदास जी ने भी कहा है |

 ” रहिमन धागा प्रेम का, मत तोड़ो चटकाय !!

    टूटे से फिर ना जुड़े, जुड़े गांठ पड़ जाए “!!
अर्थात इस कहानी से हमे यह शिक्षा मिलती है की किसी का दिल कभी नहीं दुखाना चाहिए क्योंकि अगर रिश्तो में एक बार कड़वाहट आ जाए तो उसे कभी दूर नहीं किया जा सकता |

Leave a Reply