ओणम पर्व और उसका महत्व

जैसा की हम सभी जानते है भारत त्योहारों का देश है यहाँ हर महीने कोई ना कोई त्यौहार मनाया जाता है जिनमे होली, दीपावली, रक्षाबंधन, ईद, क्रिसमस प्रमुख त्यौहार है | साथ ही साथ प्रत्येक राज्य में कोई ना कोई पर्व बहुत खास होता है जैसे गुजरात की सक्रांति, पंजाब की बैसाखी, बंगाल की दुर्गा पूजा, बिहार में मनाई जाने वाली छठ पूजा ठीक वैसे है केरल में मनाया जाने वाला लोक पर्व है ओणम, लोगों का विश्वास है कि तिरुओणम वह अवसर है जब सम्राट महाबली की आत्मा केरल की यात्रा करती है। इस उपलक्ष्य में स्थान-स्थान पर सहभोज और उत्सव का आयोजन होता है। केरल में बड़े पैमाने पर इस पर्व को मनाते हैं।legend about Onam

ओणम पर्व का इतिहास- माना जाता है कि ओणम पर्व का प्रारंभ संगम काल के दौरान हुआ था। उत्सव से संबंधित अभिलेख कुलसेकरा पेरुमल (800 ईस्वी) के समय से मिलते हैं। उस समय ओणम पर्व पूरे माह चलता था।ओणम केरल का महत्वपूर्ण पर्व है। यह त्योहार फसलों की कटाई से संबंधित है। शहर में इस त्योहार को सभी समुदाय के लोग हर्षोल्लास के साथ मनाते हैं। ओणम मलयालम कैलेंडर के पहले माह ‘चिंगम’ के प्रारंभ में मनाया जाता है। यह पर्व चार से दस दिनों तक चलता है जिसमें पहला और दसवाँ दिन सर्वाधिक महत्वपूर्ण होता है।onam

ओणम पर्व की कहानी- ओणम पर्व वैसे तो किसानो का पर्व है पर इसे पुरे केरल में मनाया जाता है इसे  राजा महाबली के स्वागत में प्रति वर्ष आयोजित किया जाता है जो दस दिनों तक चलता है। उत्सव त्रिक्काकरा (कोच्ची के पास)  केरल के एक मात्र वामन मंदिर से प्रारंभ होता है।इसके पीछे के बहुत सुन्दर कथा है बहुत समय पूर्व एक असुर था हिरणकश्यप उनके पुत्र हुए प्रह्लाद जो महँ विष्णु भक्त थे ठीक उन्ही की तरह उनके पोते महाराज बलि भी विष्णु भक्त न्यायप्रिय दानी राजा थे जैसे जैसे वो बड़े हुए उनका राज्य भी बढ़ता गया और अपने पराक्रम से उन्होंने तीनो लोको पर विजय प्राप्त कर ली ये देख देवता भयभीत हुए की कहीं संपूर्ण सृष्टि में असुरो का साम्राज्य न हो जाए और इस प्रकार उन्होंने भगवान् विष्णु की उपासना की, तब भगवान् विष्णु उनकी सहायता के लिए देवी अदिति के पुत्र के रूप में जन्म लेते है जो की उनका पांचवा अवतार भी है और वामन रूप में वो महाराज बलि के पास जाते है जो की यज्ञ कर रहे होते है और उनसे भिक्षा मांगते है

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राजा बलि उन्हें वचन देते है की वो जो भी मांगेंगे वो उन्हें देंगे अतः भगवान् वामन उनसे तीन पग जमीन की मांग करते है उनकी मांग देख कर राजा बलि के गुरु शुक्राचार्य समझ जाते है की ये कोई साधारण ब्राम्हण नहीं है और राजा बलि को वचन न पूरा करने की सलाह देते है, किन्तु राजा बलि एक महान दानी राजा थे तो वो गुरु की बात इंकार करते हुए तीन पग जमीन देने को राजी होते है  तब भगवान् वामन अपने विशाल रूप में प्रकट होकर अपने एक पग में पूरी पृथ्वी तथा अपने दूसरे पग में पूरी आकाशगंगा नाप लेते है और तब महाराज बलि से पूछते है की बताए अब अपना तीसरा पग कहाँ रखु, भगवन विष्णु को पहचानने के बाद भावविभोर राजा बलि भगवान् वामन को अपना तीसरा पग अपने शिर पर रखने को कहते है इसी के साथ महाराज बलि पाताल में समा जाते है ,उनकी कर्तव्यनिष्ठा और दान से प्रभावित होकर भगवान् वामन उनसे वर मांगने को कहते और वर में महाराज बलि मांगते है की हर वर्ष ओणम पर्व उनकी याद में मनाया जाए और इस दिन उन्हें धरती पर आने की अनुमति प्रदान की जाए ताकि वो यहाँ आकर अपनी प्रजा के सुख दुःख जान सके तब से आज तक ओणम पर्व महाराज बलि के पाताल से धरती पर लौटने की ख़ुशी में मनाया जाता है |

कैसे मनाया जाता है- ओणम में प्रत्येक  घर के आँगन में फूलों की पंखुड़ियों से सुन्दर सुन्दर रंगोलिया (पूकलम) डाली जाती हैं। युवतियां  उन रंगोलियों के चारों तरफ वृत्त बनाकर उल्लास पूर्वक नृत्य (तिरुवाथिरा कलि) करती हैं। इस पूकलम का प्रारंभिक स्वरुप पहले (अथम के दिन) तो छोटा होता है परन्तु हर रोज इसमें एक और वृत्त फूलों का बढ़ा दिया जाता है। इस तरह बढ़ते बढ़ते दसवें दिन (तिरुवोनम)  यह पूकलम वृहत आकार धारण कर लेता है। इस पूकलम के बीच त्रिक्काकरप्पन (वामन अवतार में विष्णु), राजा महाबली तथा उसके अंग  रक्षकों की प्रतिष्ठा होती है जो कच्ची मिटटी से बनायीं जाती है। Thiruvonapulari

ओणम मैं नोका दौड जैसे खेलों का आयोजन भी होता है। ओणम एक सम्पूर्णता से भरा हुआ त्योहार है जो सभी के घरों को ख़ुशहाली से भर देता है। nauka

१९६१ में इसे केरल का नेशनल फेस्टिवल घोषित कर दिया गया |ओणम में नए कपडे ख़रीदे और पहने जाते है, महाराज महाबली महान दानी थे इसलिए इस पर्व पर दान का भी विशेष महत्व है | ओणम पर्व के आखरी दिन बनाए जाने वाले पकवानो को ओणम सघा कहते है इसमें २६ तरह के पकवान बनाकर केले के पत्तो पर पसोसा जाता है |

onam sagha

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