नोबेल शांति पुरस्कार विजेता-कैलाश सत्यार्थी

कैलाश सत्यार्थी वैसे तो भारत में काफी बड़ा नाम है पर इनके बारे में लोगो को तब और पता चला जब इन्हे शांति दूत के रूप में नोबल पुरुस्कार से सम्मानित किया गया | नोबल पुरस्कार नोबेल फाउंडेशन द्वारा विश्व स्तर पर शांति के लिए किए गए प्रयासों के लिए दिया जाता है। इन्होने बाल श्रमिकों के उत्थान में काफी कार्य किया है बचपन बचाओ आंदोलन की शुरुवात सत्यार्थी जी ने ही की और छोटे बच्चो को श्रमिक जीवन से मुक्ति दिला के उनके शिक्षा के लिए प्रयास किये और अब तक कर रहे है |

satya

प्रारंभिक जीवन-भारत के मध्य प्रदेश के विदिशा में जन्मे कैलाश सत्यार्थी पेशे से एक विधुत इंजीनियर है २६ वर्ष की उम्र में ही करियर छोड़कर बच्चों के लिए काम करना शुरू कर दिया था। उनका जीवन गाँधी जी आदर्शो से काफी प्रभावित भी है सत्यार्थी का जन्म ११ जनवरी १९५४ को भारत में मध्यप्रदेश के विदिशा जिले में हुआ था. उनका वास्तविक नाम कैलास शर्मा है उन्होंने गवर्नमेंट बॉयज हायरसेकण्ड्री स्कूल से अपनी प्रारंभिक शिक्षा और सम्राट अशोक टेक्नोलॉजिकल इंस्टिट्यूट, विदिशा से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की पढाई पूरी की और फिर हाई-वोल्टेज इंजीनियरिंग में उन्होंने पोस्ट ग्रेजुएशन की उपाधि प्राप्त की |

कैलाश शर्मा से कैलाश सत्यार्थी का सफर- कहते है न जिनको जीवन में आगे कुछ बड़ा करना होता है उनमे वो चिंगारी बचपन में ही दिख जाती है ठीक ऐसा ही बालक कैलाश के साथ भी हुआ बचपन से उनका ह्रदय करुणा से भरा हुआ था और सत्यार्थी बनने की शुरुवात भी यही से हुई एक बार उन्होंने नेताओ के भाषण में सुना की देश को दलितों के हित में प्रयास करना है जगह जगह चुनावो में भाषणों में यही मुद्दा छाया हुआ था तो बालक कैलाश और उनके साथियो ने मिलकर सोचा क्यों न इस क्षेत्र में कुछ काम किया जाए और अपने कुछ दलित साथियो से भोजन का इंतजाम करने को कहा और कुछ क्षेत्रीय नेताओ को अपने कार्यक्रम में आने का निमंत्रण दिया सुबह से शाम हुई और शाम से रात पर कोई नेता वहाँ न आया और क्योंकि इतना खाना बन चुका था तो पास के कुछ सवर्णो को भोजन के लिए बुलाया और उन्होंने भी आने से इंकार कर दिया |

SATYARTHI

इस बात ने बालक कैलाश को इतना आहत किया की उन्होंने अपने उपनाम में से शर्मा हटाने का निश्चय किया अब समस्या ये थी की नाम रखे क्या क्योंकि उस वक़्त गांधीजी का काफी प्रभाव था लोगो पर साथ ही सत्याग्रह आंदोलन भी अपने चरम पर था अतः कैलाश जी ने अपना उपनाम बदल कर सत्यार्थी रख लिया अर्थात सत्य की मार्ग पर अग्रसर |

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कैलाश जी द्वारा किए गए कार्य -एक भारतीय बाल अधिकार कार्यकर्ता और बाल-श्रम के विरुद्ध पक्षधर हैं। उनके कर्त्तव्य की ये रहे आसान नहीं थी उन्हें कड़ी निंदा और हमलो का सामना भी करना पड़ा | बच्चो को छुड़ाने से ज्यादा कठिन कार्य था उन्हें विश्वास दिलाना की ये कार्य उनकी भलाई के लिए किया जा रहा है पर सत्यार्थी जी ने हार नहीं मानी और अपने कर्तव्य पथ अपर अग्रसर है उन्होंने १९८० में बचपन बचाओ आन्दोलन की स्थापना की जिसके बाद से वे विश्व भर के १४४ देशों के ८३,००० से अधिक बच्चों के अधिकारों की रक्षा के लिए कार्य कर चुके हैं। सत्यार्थी के कार्यों के कारण ही वर्ष १९९९ में अंतरराष्ट्रीय श्रम संघ द्वारा बाल श्रम की निकृष्टतम श्रेणियों पर संधि सं॰ १८२ को अंगीकृत किया गया, जो अब दुनियाभर की सरकारों के लिए इस क्षेत्र में एक प्रमुख मार्गनिर्देशक है कैलास सत्यार्थी भारतीय बाल अधिकार और शिक्षा वकील और बाल मजदूरी के खिलाफ लड़ने वाले कार्यकर्त्ता है. उन्होंने १९८० में बचपन बचाओ आन्दोलन की स्थापना की थी और १४४ देशो से ८३००० बच्चो की उन्होंने सुरक्षा की थी. उन्होंने इन बच्चो को उनके अधिकार दिलवाए. सत्यार्थी राष्ट्रिय ही नही बल्कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बाल कामगारों से काम कराने का विरोध करते है |

कैलास सत्यार्थी के अवार्ड्स और सम्मान –

२०१५ : हॉवर्ड यूनिवर्सिटी द्वारा “साल का सर्वश्रेष्ट परोपकारी का सम्मान”.

२०१५ : अमित यूनिवर्सिटी, गुरगाव द्वारा डॉक्टरेट की उपाधि.

२०१४ : नोबेल शांति पुरस्कार

२००९ : लोकशाही का सर्रथक पुरस्कार (डिफेंडर ऑफ़ डेमोक्रेसी अवार्ड यु ऐस)

२००८ : अल्फोन्सो कामिन इंटरनेशनल अवार्ड (स्पेन)

२००७ : इटालियन राज्यसभा का गोल्ड मेडल

२००७ : US स्टेट डिपार्टमेंट द्वारा हीरो का सम्मान.

२००६ : आज़ादी पुरस्कार (फ्रीडम अवार्ड, यु ऐस)

१९९९ : फ्राइडरिच एबर्ट स्तिफ्टउंग अवार्ड (जर्मनी)

१९९८ : गोल्डन फ्लैग अवार्ड (नीदरलैंड)

१९९५ : रोबर्ट एफ. कैनेडी ह्यूमन राईट अवार्ड (यु ऐस)

१९९५ : द ट्रम्पटर अवार्ड (यु ऐस)

१९९४ : द आचेनेर इंटरनेशनल पीस अवार्ड (जर्मनी)

१९९३ : एलेक्टेड अशोका फेलो (यु ऐस)

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