मकर संक्रांति

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मकर सक्रांति – आज के दिन से सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायण में आ जाते हैं। उत्तरायण में सूर्य रहने के समय को शुभ समय माना जाता है और मांगलिक कार्य आसानी से किए जाते हैं। चूंकि पृथ्वी दो गोलार्धों में बंटी हुई है ऐसे में जब सूर्य का झुकाव दाक्षिणी गोलार्ध की ओर होता है तो इस स्थिति को दक्षिणायन कहते हैं और सूर्य जब उत्तरी गोलार्ध की ओर झुका होता है तो सूर्य की इस स्थिति को उत्तरायण कहते हैं। इसके साथ ही 12 राशियां होती हैं जिनमें सूर्य पूरे साल एक-एक माह के लिए रहते हैं। सूर्य जब मकर राशि में प्रवेश करते हैं तो इसे मकर संक्रांति कहते हैं।संक्रांति ही वो दिन होता है जब सूर्य धनु राशि छोड़कर मकर राशि में प्रवेश करता है।

मकर संक्रांति

          मकर संक्रांति के पर्व को देश में माघी, पोंगल, उत्तरायण, खिचड़ी और बड़ी संक्रांति आदि नामों से जाना जाता है। इस दिन तिल और गुड़ से बनाए गए मिष्ठानो का विशेष महत्व होता है , कई प्रदेशो में पतंगबाजी का आयोजन भी किया जाता है मकर संक्रांत के दिन गुजरात में बड़े रूप में पतंगबाजी का आयोजन होता है । और इसी के साथ बसंत ऋतू का भी आगमन होता है ।मकर सक्रांति आज के दिन से सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायण में आ जाते हैं। उत्तरायण में सूर्य रहने के समय को शुभ समय माना जाता है और मांगलिक कार्य आसानी से किए जाते हैं। चूंकि पृथ्वी दो गोलार्धों में बंटी हुई है ऐसे में जब सूर्य का झुकाव दाक्षिणी गोलार्ध की ओर होता है तो इस स्थिति को दक्षिणायन कहते हैं और सूर्य जब उत्तरी गोलार्ध की ओर झुका होता है तो सूर्य की इस स्थिति को उत्तरायण कहते हैं। इसके साथ ही 12 राशियां होती हैं जिनमें सूर्य पूरे साल एक-एक माह के लिए रहते हैं। सूर्य जब मकर राशि में प्रवेश करते हैं तो इसे मकर संक्रांति कहते हैं।संक्रांति ही वो दिन होता है जब सूर्य धनु राशि छोड़कर मकर राशि में प्रवेश करता है।

मकर संक्रांति

          मकर संक्रांति के पर्व को देश में माघी, पोंगल, उत्तरायण, खिचड़ी और बड़ी संक्रांति आदि नामों से जाना जाता है। इस दिन तिल और गुड़ से बनाए गए मिष्ठानो का विशेष महत्व होता है , कई प्रदेशो में पतंगबाजी का आयोजन भी किया जाता है मकर संक्रांत के दिन गुजरात में बड़े रूप में पतंगबाजी का आयोजन होता है । और इसी के साथ बसंत ऋतू का भी आगमन होता है ।

मकर संक्रांति

जब सूर्य धनु राशि छोड़कर मकर राशि में प्रवेश करता है। और इसी के साथ उसकी उत्तरायण होने की गति आरंभ होती है। यह शुभ काल माना जाता है। माना जाता है कि इस दिन सूर्य अपने पुत्र शनिदेव से नाराजगी त्यागकर उनके घर गए थे इसलिए इस दिन को सुख और समृद्धि का दिन भी माना जाता है।

मकर संक्रांति पूजा विधि- मकर संक्रांति के दिन सुबह किसी नदी, तालाब शुद्ध जलाशय में स्नान करें अथवा ब्रम्हमुहर्त में उठ कर पानी में तिल डाल कर स्नान करे, इसके बाद नए या साफ वस्त्र पहनकर सूर्य देवता की पूजा करें। चाहें तो पास के मंदिर भी जा सकते हैं। इसके बाद ब्राह्मणों, गरीबों को दान करें। इस दिन दान में आटा, दाल, चावल, खिचड़ी और तिल के लड्डू विशेष रूप से लोगों को दिए जाते हैं। इसके अलावा अपने सामर्थ्य अनुसार कम्बल तेल आदि भी दान करने का विधान है इस दिन विशेषतौर पर तिल के लड्डू खाने व दान करने का भी विधान है ।

मकर संक्रांति

संस्कृति के अनुसार-भारत में सांस्कृतिक विविधताओं के लिहाज से भी मकर संक्रांति का अपना महत्व है। देश के ज्यादातर हिस्सों में यह त्योहार मनाया जाता है। हालांकि, नाम और प्रचलित परंपराएं अलग-अलग हैं। जैसे, देश के दक्षिणी राज्यों केरल, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में इसे सिर्फ संक्रांति ही कहा जाता है। तमिलनाडु की बात करें तो वहां ये त्योहार चार दिन चलता है और वहां इसे पोंगल कहा जाता है। पंजाब और हरियाणा में इसे लोहड़ी कहा जाता है। असम में बिहू वही है जो हमारे यहां यानी उत्तर भारत में मकर संक्रांति है।

वैज्ञानिक दृष्टिकोण से -तिल के सेवन से शरीर गर्म रहता है और इसके तेल से शरीर को भरपूर नमी भी मिलती है। दरअसल सर्दियों में शरीर का तापमान गिर जाता है। ऐसे में हमें बाहरी तापमान से अंदरुनी तापमान को बैलेंस करना होता है। तिल और गुड़ गर्म होते हैं, ये खाने से शरीर गर्म रहता है। इसलिए इस त्योहार में ये चीजें खाई और बनाई जाती हैं। तिल में कॉपर, मैग्नीशियम, ट्राइयोफान, आयरन, मैग्नीज, कैल्शियम, फास्फोरस, जिंक, विटामिन बी 1 और रेशे प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। एक चौथाई कप या ३६  ग्राम तिल के बीज से २०६ कैलोरी ऊर्जा प्राप्त होती है। तिल में एंटीऑक्सीडेंट गुण भी पाए जाते हैं।  शरीर में उपस्थित जीवाणुओं और कीटाणुओं का दमन करता है।इस मौसम में सुबह का सूर्य प्रकाश शरीर के लिए स्वास्थ्यवर्धक होता है तथा ये त्वचा व हड्डियों के लिए बहुत फायदेमंद होता है। इसीलिए इस दिन पतंग उड़ाई जाती है जिससे कि सूर्य किरणों का लाभ शरीर को मिले।

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