इंसान तो है मगर इंसानियत नहीं

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हाल ही में जो घटनाए हमे देखने को मिल रही है किसी का भी इंसानियत से विश्वास हटाने में काफी है | इंसान को सभी जानवरो से ऊँचा दर्जा प्राप्त है, सिर्फ इसलिए नहीं की वो दो पैरो पर चल सकता है बल्कि इसलिए क्योंकि वो अन्य की तुलना में ज्यादा समझदार है, लेकिन ऐसी समझदारी  किस काम की जिसमे इंसानियत न हो ।

आजकल लोग अपनी काल्पनिक दुनिआ में इतना उलझ चुके है की इंसान और इंसानियत से उनका दूर दूर तक कोई सम्बन्ध नहीं रह गया है |

हाल ही हुए एक वाकये ने मुझे सोचने पर मजबूर कर दिया क्या वाकई हम इंसान कहलाने लायक है भी या नहीं ?? हुआ ये की मै एक शाम ऑटो में कहीं जा रही थी तभी रास्ते में एक खून से लतपथ इंसान रोड पर पड़ा दिखा , शायद उसका एक्सीडेंट हुआ था जिसे दर्जनों की भीड़ ने आपस में घेर रखा था और हैरान करने वाली बात ये थी की कई गाड़िया वहाँ से गुजरी पर किसी ने रुक कर मदद करने की कोशिश भी नहीं की | कुछ लोगो की इंसानियत जागी और वो गाड़ी रोकने का प्रयास कर रहे थे पर कोई गाड़ी वाला वहाँ रुकने को तैयार नहीं हुआ, यहाँ तक की जिस ऑटो में मै थी मेने ऑटोवाले से रुकने की बहुत रिक्वेस्ट की ताकि उस घायल इंसान को हॉस्पिटल पहुंचने में मदद करे, पर उसने साफ़ मना कर दिया कि वो पुलिस के चक्कर में नहीं फसने वाला  ।

प्यार से न मानते देख मैंने उसपर गुस्सा भी किया, उसे समझाने का प्रयास भी किया – इसकी जगह आपके अपने भी हो सकते थे पर वो नहीं माना | मेरे यहाँ तक कहने पर कि अगर वो मर गया तो खुद को माफ़ कैसे कर पाओगे उसने सीधे शब्दों में कह दिया कि अगर उसके नसीब में बचना हुआ तो भगवान उसे बचा लेगा, मुझे ये समझ नहीं आता जब इंसान इंसान कि मदद नहीं करना चाहता तो वो भगवान से कैसे उम्मीद करता है कि भगवान कुछ करेंगे | ऐसे लोगो को देख के सच में दिमाग सोचने पर मजबूर हो जाता है कि क्या हम सच में इंसान कहलाने लायक है ??

जबकि अब तो पुलिस भी इतनी मदद करती है लोगो कि घायल व्यक्ति को लेन वाले को अपना नाम बताना तक जरुरी नहीं पर फिर भी लोग इस हद तक गिर जाते है | न इनका कोई जमीर है, न अंतरात्मा, जो इन्हे धिक्कारे | ऐसे लोग जिनमे इंसानियत नहीं है, इंसान कहलाने के लायक नहीं, फिर हम इन्हे इंसान क्यू समझे इन लोगो के साथ भी व्ही सुलूक किया जाए जो जानवर के साथ किया जाता है ताकि इंसान और जानवर के बिच का फर्क तो समझ आए इन्हे |

मेरे इस लेख से अगर मै किसी एक इंसान कि इंसानियत को भी जगा पाई तो मै अपना लिखना सार्थक समझूंगी ।
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