दुर्गा बनो सीता नहीं

हाल ही में अख़बार में देखा गया की बिहार में किसी बालिका गृह में ३२ लड़कियों का शोषण किया गया,पिछले कुछ दिनो में देश में रेप की घटना में काफी बढ़ोतरी हुई है जबकि महिला अपराध को लेकर हमारी सरकार पहले से ही काफी सख्त है और लगातार इस तरह की बढ़ती घटनाए हमे सोचने को मजबूर करती है की कहाँ कमी रह गई जो औसतन हर ६ घंटे में एक रेप की खबर मिलती है |durga

समय आ गया है की इन घटनाओ से बचने के लिए सिर्फ सरकार को ही नहीं अपितु उनके माता पिता को और समाज को कुछ कड़े कदम उठाने पड़ेंगे | जरुरत है की अपनी बिटिया को इतना मजबूत बनाया जाए की कोई नजर उठाने से पहले भी १०० बार सोचे साथ ही साथ आवश्यकता है की लड़को के माता पिता को की अपने बच्चो को लड़कियों का सम्मान करना सिखाए | आज कुछ ऐसी ही बातो पर विचार करेंगे जिसके बारे में हर माता पिता को अब गंभीर हो जाना चाहिए|

दुर्गा बनो सीता नहीं- हर लड़की के माता पिता को जरुरत है की वो अपनी बेटी को दुर्गा जैसा मजबूत बनाए,ताकि वो अपने ऊपर हो रहे अत्याचारों के खिलाफ आवाज उठा सके हालाँकि हमारे देश में सीता को ही आदर्श बेटी का दर्जा प्राप्त है पर न ये त्रेतायुग है ना ही यहाँ भगवान राम है जो चुप रहकर अपने ऊपर हो रहे अत्याचार सहते रहे |

हर माता पिता बचपन से ही अपनी बेटी को सहनशीलता का पाठ सिखाते है माँ सीता का उदहारण देकर हर तकलीफ को सहने की सलाह देते है और अपनी इस छोटी सोच को संस्कारो का नाम देकर उस मासूम को सारे अत्याचार सहने को विवस करते है क्यों ?? क्या माता सीता ही देवी थी माँ दुर्गा नहीं ?? क्या जिंदगी जीने का हक़ सिर्फ लड़को का है ? किसी भी लड़के की ही तरह हमे भी एक बार ही ये जीवन मिला है और इसे अपनी मर्जी से जीना चाहिए | तुम्हे भी खुश रहने का अधिकार है ये बात हर लड़की को जरूर पता होनी चाहिए |

उसे बताए की वो कमजोर नहीं है- बचपन से ही माँ बाप बच्चो को सिखाते है लड़के मजबूत होते है लड़किया कमजोर! अगर कोई छोटा बच्चा रोने लगे तो तुरंत ही सुनने को मिलता है क्या लड़कियों की तरह रो रहा है, बचपन से थोपी गई ये मानसिकता बचपन से ही बच्चो के दिमाग में ये डाल देती है की लड़किया कमजोर है कोई उन्हें इस फैक्ट से अवगत करवाए की विज्ञानं भी कहता है एक महिला एक बच्चे को जन्म देते वक़्त उतना दर्द सेहन करती है जितना दर्द पुरे शरीर की हड्डियों के एक साथ टूटने पर होता है,अब खुद अंदाजा लगा लीजिये कौन ज्यादा मजबूत है | जो महिला किसी पुरुष को जन्म दे सकती है वो कुछ भी कर सकती है और उसे कमजोर समझने वाला दुनिआ का सबसे बड़ा बेवकूफ है,बस जरुरत है उसे उसकी ताक़त का अंदाजा दिलवाने की | इसलिए हर माता पिता को चाहिए वो बचपन से ही अपनी बिटिया को बताए वो मजबूत है ताकि आगे किसी कठिनाई में वो खुद को किसी से काम न समझे |strong

उसे स्वतंत्र बनाए- लड़कियों के दिमाग में बचपन से ही डाल दिया जाता है की वो पराश्रित है मायके में अपने पिता के ऊपर और ससुराल में पति के ऊपर उसका अपना कोई अस्तित्व नहीं कोई वजूद नहीं | अब जरा सोच के बताइये आपमें से कल्पना चावला के पिता का नाम कौन जानता है या किरण बेदी के पति का नाम किसे पता है ?? शायद ही जवाब हो आपके पास ये जानी जाती है अपने नाम से अपने काम से इनका अपना खुद का वजूद है तो कैसे आप अपनी बिटिया से कह देते है की वो आश्रित है उसका वजूद नहीं | बचपन से ही अपनी बिटिया को स्वतंत्र बनाए उनके सपनो को पूरा करने में उनकी मदद करे ना की समाज और रिश्तेदारों के नाम पर उनके पंख काटे |independent

कई बार माता पिता सुरक्षा का बहाना बना अपनी बिटिया को कैद कर देते है, वो शायद ये भूल गए है अगर गलत होना है तो विद्यालयों में, घर में अस्पतालों में हर जगह ही तो दरिंदे है आप कहाँ कहाँ से उन्हें बचाएंगे माना विद्यालय न भेजे घर के बाहर न भेजे पर क्या घर सुरक्षित है ये आप यकीं से कह सकते है?? नहीं ?? क्योंकि आंकड़े बताते है ६०% केशो में अपराधी घर का ही कोई सदस्य होता है | तो बेहतर ये है न की बिटिया को उड़ने दिया जाए अपने सपनो को पूरा करने की हिम्मत दी जाए ताकि कल को कोई विषम परिस्थिति आती भी है तो वो किसी पर आश्रित नहीं रहेगी |

उसे अहसास कराए की वो खूबसूरत है– खूबसूरत लगना और खुद को सुन्दर कहलाना हर लड़की का मौलिक अधिकार है, शर्म आती है की हमारे देश में आज भी खूबसूरती को लड़की के गोरे रंग और दुबले शरीर से मापा जाता है बचपन से ही माँ बाप यहाँ तक की समाज वाले तने देना शुरू कर देते है अरे काली से कौन शादी करेगा अरे वजन काम कर तेरे लिए लड़का नहीं मिलेगा क्यों ?? लड़को से कोई क्यू नहीं कहता वजह कम कर कौन लड़की देगा या तुझ जैसे काले से कौन शादी करेगा | जबकि श्याम वर्ण तो हमारे देश में खूबसूरती की मिशाल है हमारे कन्हैया भी तो काले है और काले रंग में माँ काली भी तो पूजनीय है तो काला या मोटा कह कर किसी का अपमान  करना कहाँ तक सही है अपनी गुड़िया को अहसाह दिलाए उसके काला या मोटा होने पर आपके प्यार में कोई फर्क नहीं पड़ता वो हर तरह से खूबसूरत है |Tell-Her-Shes-Beautiful

उसे बताए की इज्जत पाना उसका हक़ है – अपनी बिटिया को ये जरूर सिखाए की इज्जत पाना उसका हक़ है,सिर्फ इसलिए की वो एक लड़की है कोई उसका अपमान नहीं कर सकता बल्कि माता पिता को भी चाहिए की वो उसका सम्मान करे और किसी और को भी उसके सम्मान से खेलने की आजादी न दे चाहे वो उसका पति ही क्यों न हो | सम्मान हर व्यक्ति का मौलिक अधिकार है और इसे कोई नहीं छीन सकता कोई भी नहीं | चाहे वो उसके विचारो का सम्मान हो या उसके पहनावे किसी और को कोई हक़ नहीं की वो अपने विचार उस पर जबरदस्ती ठोके अपनी परम्परा के नाम पर |अपने लड़को को सिखाए की लड़को और लड़कियों में कोई अंतर नहीं और उन्हें लड़कियों का सम्मान करना चाहिए, और लड़कियों को भी सिकाहे अपने सम्मान से कभी समझौता न करे जरुरत पड़े तो अपने अपनों से भी बगावत करे पर इज्जत पाना आपका अधिकार है |respect

समानता का अधिकार- दुर्भाग्यपूर्ण है की हमारे देश में लड़को और लड़कियों में आज भी अंतर समझा जाता है जन्म से पहले ही भ्रूण परिक्षण करवा के कन्याओ को कोख में ही ख़तम कर दिया जाता है परिणामस्वरूप हमारे देश में लड़कियों का अनुपात लड़को की अपेक्षा कम है, सरकार ने भ्रूण हत्या रोकने के लिए कई कानून बनाए पर अब भी कोख में मारा जाना या जन्म के साथ हत्या में कमी नहीं आई | जो कोख में बच जाती है जन्म लेने के बाद उन्हें तरह तरह से प्रताड़ित किया जाता है उनके अधिकार छीन कर | जबकि आज के दौर में लड़किया कहीं भी लड़को से पीछे नहीं तब भी ये असमानता | माता पिता को चाहिए की बचपन से ही उन्हें समानता का अधिकार दे ताकि वयस्क होने पर वो अपने अधिकारों के हनन की विरुद्धा आवाज उठा सके |samanta

 

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