अमरनाथ यात्रा

भारत चमत्कारों का देश है आज भी यहाँ कई ऐसे अजूबे है जिनका वैज्ञानिको के पास भी कोई जवाब नहीं है जैसे ज्वाला देवी मंदिर में ज्वालाएँ कहाँ से आ रही है, या माँ कामख्या मंदिर से निकलने वाला पानी लाल कैसे हो जाता है ऐसे ही भारत में कई जगहों पर भगवान ने अपने होने के सबूत दिए है उनमे से एक है बाबा बर्फानी जिन्हे अमरनाथ के नाम से भी जाना जाता है इस बार ये यात्रा २८ जून से शुरू होकर २७ अगस्त तक चलेगी |

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  • परिचय अमरनाथ हिन्दुओं का एक प्रमुख तीर्थस्थल है। यह कश्मीर राज्य के श्रीनगर शहर से करीब १३५ कि.मी. कि दुरी पर स्थित है इस शिवलिंग कि खास बात ये है कि ये स्वयं निर्मित होता है इसलिए इसे स्वयंभू हिमानी शिवलिंग भी कहते है | इस शिवलिंग के दर्शन आषाढ़ पूर्णिमा से रक्षाबंधन तक प्राप्त होते है, यह शिवलिंग चन्द्रमा के आकर के साथ साथ बढ़ता और घटता है इस शिवलिंग कि खास बात यह है कि यह ठोस बर्फ से बना है जबकि इसके आस पास कि बर्फ हिमकण के रूप में मौजूद है यहाँ पास ही में माँ पार्वती और भगवान गणेश कि प्रतिमा भी स्थापित है अमरनाथ गुफा भगवान शिव के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक है। अमरनाथ को तीर्थों का तीर्थ कहा जाता है क्यों कि यहीं पर भगवान शिव ने माँ पार्वती को अमरत्व का रहस्य बताया था।

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  • कहानी अमरनाथ की-एक बार देवी पार्वती ने देवों के देव महादेव से पूछा, ऐसा क्यों है कि आप अजर हैं, अमर हैं लेकिन मुझे हर जन्म के बाद नए स्वरूप में आकर, फिर से बरसों तप के बाद आपको प्राप्त करना होता है । जब मुझे आपको पाना है तो मेरी तपस्या और इतनी कठिन परीक्षा क्यों? आपके कंठ में पडी़ नरमुंड माला और अमर होने के रहस्य क्या हैं? पहले तो भगवान शिव ने इसका जवाब नहीं दिया किन्तु पार्वती जी के जिद करने से अमरनाथ गुफा में भगवान शिव ने उन्हें अपने अमरत्व की कथा सुनाई किन्तु कथा के बीच में ही पार्वती जी की नींद आ गई उस गुफा में भगवान शिव और पार्वती के अलावा भी एक कबूतर का जोड़ा और एक शुक पक्षी भी था जो पार्वती जी के सो जाने के बाद पार्वती जी की जगह हुंकार भर रहा था, जब कथा समाप्त हुई तो पार्वती जी ने बताया की वो बीच में सो गई थी तब प्रश्न यह था की हुंकार कौन भर रहा था तब शिव जी ने देखा की एक शुक कथा सुन रहा है और कथा के प्रभाव से वो अमर भी हो गया ये देख कर भगवान शिव को क्रोध आ गया वह क्रोधित होकर शुक को मारने के लिए उठे शुक वहां से निकलकर भागा वह व्यास जी के आश्रम में पहुंचा व्यास जी की पत्नी ने उसी समय जम्हाई ली और शुक सूक्ष्म रूप धारण कर उनके मुख में प्रवेश कर गयामहादेव ने जब उसे व्यास की शरण में देखा तो मारने का विचार त्याग दिया शुक व्यास की पत्नी के गर्भस्थ शिशु हो गए.गर्भ में ही इन्हें वेद, उपनिषद, दर्शन और पुराण आदि का सम्यक ज्ञान प्राप्त हो गया था कहते है शुकदेवजी आज भी अमर है और भाग्यशाली श्रधलुओ को आज भी गुफा में कबूतरों के जोड़े के दर्शन प्राप्त होते है |

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  • संपूर्ण अमरनाथ यात्रा- पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, अमरनाथ की गुफा ही वह स्थान है जहां भगवान शिव ने पार्वती को अमर होने के गुप्त रहस्य बतलाए थे, उस दौरान वहां उन दो दिव्य ज्योतियों’के अलावा तीसरा कोर्इ प्राणी नहीं था। न महादेव का नंदी और नहीं उनका नाग, न सिर पर गंगा और न ही गणपति, कार्तिकेय |गुप्त स्थान की तलाश में महादेव ने अपने वाहन नंदी को सबसे पहले छोड़ा, नंदी जिस जगह पर छूटा, उसे ही पहलगाम कहा जाने लगा। अमरनाथ यात्रा यहीं से शुरू होती है। यहां से थोडा़ आगे चलने पर शिवजी ने अपनी जटाओं से चंद्रमा को अलग कर दिया, जिस जगह ऐसा किया वह चंदनवाड़ी कहलाती है। इसके बादगंगा जी को पंचतरणी में और कंठाभूषण सर्पों को शेषनाग पर छोड़ दिया, इस प्रकार इस पड़ाव का नाम शेषनाग पड़ा।अमरनाथ यात्रा में पहलगाम के बाद अगला पडा़व है गणेश टॉप, मान्यता है कि इसी स्थान पर महादेव ने पुत्र गणेश को छोड़ा। इस जगह को महागुणा का पर्वत भी कहते हैं। इसके बाद महादेव ने जहां पिस्सू नामक कीडे को त्यागा, वह जगह पिस्सू घाटी है।इस प्रकार महादेव ने अपने पीछे जीवनदायिनी पांचों तत्वों को स्वंय से अलग किया। इसके पश्चात् पार्वती संग एक गुफा में महादेव ने प्रवेश किया। कोर्इ तीसरा प्राणी, यानी कोर्इ कोई व्यक्ति, पशु या पक्षी गुफा के अंदर घुस कथा को न सुन सके इसलिए उन्होंने चारों ओर अग्नि प्रज्जवलित कर दी। फिर महादेव ने जीवन के गूढ़ रहस्य की कथा शुरू कर दी।

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  • यात्रा की शुरुवात- अमरनाथ यात्रा जो की पहलगाम से शुरू होती है वह से बाबा बर्फानी तक पहुंचने के दो विकल्प मौजूद है पहला रास्ता पहलगाम से जाता है और दूसरा सोनमर्ग बालटाल से दूसरा मार्ग छोटा तो है किन्तु बहुत सी कठिनाइयों और जोखिम भरा है इसलिए सरकार भी पहलगाम वाले मार्ग से जाने का सुझाव देती है पहलगाम जम्मू से ३१५ कि.मी . कि दुरी पर है जहाँ बस या ट्रेन कि सहायता से पंहुचा जा सकता है वहाँ से पैदल यात्रा कि शुरुवात होती होती है पहलगाम के बाद पहला पड़ाव चंदनबाड़ी है, जो पहलगाम से आठ किलोमीटर की दूरी पर है। पहली रात तीर्थयात्री यहीं बिताते हैं। यहाँ रात्रि निवास के लिए कैंप लगाए जाते हैं। इसके ठीक दूसरे दिन पिस्सु घाटी की चढ़ाई शुरू होती है।लिद्दर नदी के किनारे-किनारे पहले चरण की यह यात्रा ज्यादा कठिन नहीं है चंदनबाड़ी से १४ किलोमीटर दूर शेषनाग में अगला पड़ाव है। यह मार्ग खड़ी चढ़ाई वाला और खतरनाक है। यहीं पर पिस्सू घाटी के दर्शन होते हैं। अमरनाथ यात्रा में पिस्सू घाटी काफी जोखिम भरा स्थल है। यात्री शेषनाग पहुँच कर ताजादम होते हैं। यहाँ पर्वतमालाओं के बीच नीले पानी की खूबसूरत झील है।किंवदंतियों के मुताबिक शेषनाग झील में शेषनाग का वास है और चौबीस घंटों के अंदर शेषनाग एक बार झील के बाहर दर्शन देते हैं, लेकिन यह दर्शन खुशनसीबों को ही नसीब होते हैं। तीर्थयात्री यहाँ रात्रि विश्राम करते हैं और यहीं से तीसरे दिन की यात्रा शुरू करते हैं।शेषनाग से पंचतरणी आठ मील के फासले पर है। मार्ग में बैववैल टॉप और महागुणास दर्रे को पार करना पड़ता हैं,यहाँ पांच छोटी-छोटी सरिताएँ बहने के कारण ही इस स्थल का नाम पंचतरणी पड़ा है।ऑक्सीजन की कमी की वजह से तीर्थयात्रियों को यहाँ सुरक्षा के इंतजाम करने पड़ते हैं।अमरनाथ की गुफा यहाँ से केवल आठ किलोमीटर दूर रह जाती हैं और रास्ते में बर्फ ही बर्फ जमी रहती है। इसी दिन गुफा के नजदीक पहुँच कर पड़ाव डाल रात बिता सकते हैं और दूसरे दिन सुबह पूजा अर्चना कर पंचतरणी लौटा जा सकता है। कुछ यात्री शाम तक शेषनाग तक वापस पहुँच जाते हैं। यह रास्ता काफी कठिन है, लेकिन अमरनाथ की पवित्र गुफा में पहुँचते ही सफर की सारी थकान पल भर में छू-मंतर हो जाती है और अद्भुत आत्मिक आनंद की अनुभूति होती है।

पूरा मार्ग कठिनाइयों से भरा हुआ है जगह जगह पर प्राकृतिक आपदाओं के साथ साथ आतंकवादी संगठनो का सामना भी करना पड़ता है जगह जगह हमारे जवान सुरक्षा के लिए तथा किसी भी विषम परस्थितियो से निपटने के लिए तैनात होते है पर कहते है परमात्मा शक्ति देता है इसी साहस के साथ लोग बड़ी संख्या में अमरनाथ यात्रा के लिए एकत्रित होते है |

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