१४ जून-वर्ल्ड ब्लड डोनर डे

Spread the love
Follow us

रक्तदान को महादान के नाम से भी जाना जाता है, ईश्वर ने हमे रक्तदान के जरिये नए लोगो को जीवनदान देने और उनसे खून के रिश्ते जोड़ने का खास तरीका प्रदान किया है । वह व्यक्ति जिसकी उम्र १८ वर्ष से ६० वर्ष के बीच है तथा जिसका वजन ४५ किलो से ज्यादा है साथ ही अगर उन्हें कोई रक्तदोष नहीं है वह हर तीन महीने में रक्तदान कर सकता है, एक स्वस्थ व्यक्ति को कुछ नहीं तो कम से कम वर्ष में २ बार अवश्य रक्तदान करना चाहिए।

दुनिआ भर में कई लोग समय पर रक्त उपलभ्द न हो पाने की वजह से मर जाते है, ऐसे में रक्तदान करके किसी को जीवन दान देकर जो सुकून प्राप्त होता है उसकी किसी से तुलना नहीं की जा सकती । रक्त से बड़ा कुछ नहीं हो सकता इसको संरक्षित करके कई जीवन को सुरक्षित किया जा सकता है आपको जानकर आश्चर्य होगा कि किसी भी देश की मात्र एक फीसद आबादी अगर रक्तदान करे तो उस देश को कभी रक्त की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा।

इसलिए मनाया जाता है वर्ल्ड  ब्लड  डोनर  डे -विश्व रक्तदान दिवस, शरीर विज्ञान में नोबल पुरस्कार प्राप्त कर चुके वैज्ञानिक कार्ल लैंडस्टाईन की याद में पूरी दुनिया में मनाया जाता है। इसका उद्देश्य रक्तदान को प्रोत्साहित करना और उससे जुड़ी भ्रांतियों को दूर करना है। इसी दिन १४ जून १८६८ को वैज्ञानिक कार्ल लैंडस्टाईन का जन्म हुआ था। उन्होंने इंसानी रक्त में एग्ल्युटिनिन की मौजूदगी के आधार पर ब्लड ग्रुप ए, बी और ओ समूह की पहचान की थी। खून के इस वर्गीकरणम ने चिकित्सा विज्ञान में महत्वपूर्ण योगदान दिया। इसी खोज के लिए कार्ल लैंडस्टाईन को सन १९३० में नोबल पुरस्कार दिया गया था।

रक्तदान

जाने क्यों है ब्लड डोनेशन की जरूरत-

  • भारत में दुर्घटना या किसी गंभीर बीमारी के शिकार कई लोग सिर्फ इसलिए मौत के मुँह में समां जाते है है क्योंकि उन्हें समय पर रक्त उपलभ्द नहीं हो पाता।
  • रक्त की जरूरत पड़ने पर इसकी कमी किसी दवा या थैरेपी से दूर नहीं की जा सकती है। मतलब रक्त का कोई विकल्प नहीं है।
  • भारत में हर साल लगभग १०  हजार बच्चे थैलिसिमिया जैसी बीमारी के साथ पैदा होते हैं। इनमें से कई बच्चों की वक्त पर खून न मिलने की वजह से मौत हो जाती है।
  • भारत में प्रतिवर्ष मात्र ९० लाख लोगों को ही रक्त मिल पाता है, जबकि ३० लाख लोगों की रक्त न मिलने से मौत हो जाती है।

रक्तदान से जुड़े तथ्य

  •     ‘O’ निगेटिव ब्लड ग्रुप यूनिवर्सल डोनर होता है, मतलब ये ग्रुप का रक्त किसी को भी चढ़ाया जा सकता है।
  • 17 से 68 वर्ष की आयु के लोगों को जिनका वजन 45 किलो से ज्यादा हो, रक्तदान कर सकता है।
  •     एक सामान्य व्यक्ति के शरीर में १०  यूनिट रक्त होता है।
  •     रक्तदान में केवल एक यूनिट रक्त ही लिया जाता है।
  •     कई बार केवल एक कार दुर्घटना में ही १०० यूनिट रक्त की आवश्यकता पड़ जाती है।
  •     एक बार रक्तदान से तीन लोगों की जिंदगी बचाई जा सकती है।
  •     भारत में केवल सात फीसद लोगों का ब्लड ग्रुप ‘O’ निगेटिव है।
  •     रक्तदान की प्रक्रिया काफी सरल है और इसमें किसी तरह की मुश्किल का सामना नहीं करना पड़ता है।
  •     रक्तदाता का वजन पल्स रेट, ब्लड प्रेशर आदि सामान्य पाए जाने पर ही रक्तदान किया जा सकता है।
  •     पुरुष तीन महीने और महिलाएं चार महीने के अंतराल में नियमित रक्तदान कर सकती हैं।
  •     हर कोई रक्तदान नहीं कर सकता। रक्तदान के लिए आपका स्वस्थ होना बहुत जरूरी है।
  •     अगर रक्तदान के बाद आपको चक्कर आने, पसीना आने, वजन कम होने या किसी अन्य तरह की समस्या लंबे समय तक बनी रहती है तो आप रक्तदान न करें।

रक्तदान के फायदे

  • रक्दान करने से कई बीमारियों से लड़ने की क्षमता बढ़ जाती है ।
  • हार्ट अटैक या नसों में थक्का जमने जैसी परेशानिया नहीं होती ।
  • नियमित रक्तदान शरीर को तंदरुस्त रखता है, नए खून बनने के साथ ही नई ऊर्जा का संचार होता है ।
  • रक्तदान खून को पतला करने में सहायक होता है जिससे कई बीमारियों का खतरा कम हो जाता है ।
  • एक बार रक्दान करने से ६५० कैलोरी बर्न होती है अतः ये वजन कम करने में भी सहायक है ।
  • शरीर में आयरन की मात्रा संतुलित होने से लिवर संबंधी बीमारी और कैंसर दोनों का खतरा दूर हो जाता है।
Please follow and like us:
error

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *