स्टैच्यू ऑफ यूनिटी- सरदार वल्लभ भाई पटेल

आज दिनांक ३१/१०/२०१८ को पूरा भारत वर्ष सरदार वल्लभ भाई पटेल की १४३ वी जयंती मना रहा है, भारत के भू-राजनीतिक एकीकरण में केंद्रीय भूमिका निभाने के लिए पटेल को भारत का बिस्मार्क और लौह पुरूष भी कहा जाता है भारत की आजादी में उनके योगदान को भुलाना आसान नहीं है, भारत की आजादी के बाद वे प्रथम गृह मंत्री और उप-प्रधानमंत्री बने। बारडोली सत्याग्रह का नेतृत्व कर रहे पटेल को सत्याग्रह की सफलता पर वहाँ की महिलाओं ने सरदार की उपाधि प्रदान की। आज उनकी जयंती पर नर्मदा नदी के ऊपर बने सरोवर बांध पर उनकी मूर्ति स्थापित की जा रही है जो अब तक की सबसे ऊँची प्रतिमा है,इसे स्टैच्यू ऑफ यूनिटी नाम दिया गया है,क्योंकि भारत की अखंडता में उनका महत्वपूर्ण योगदान है ।

SardarPatel

जीवन परिचय- सरदार पटेल का जन्म नडियाद, गुजरात में एक लेउवा/लेवा कृषक परिवार में हुआ था। वे झवेरभाई पटेल एवं लाडबा देवी की चौथी संतान थे। सोमाभाई, नरसीभाई और विट्टलभाई उनके अग्रज थे। उनकी शिक्षा मुख्यतः स्वाध्याय से ही हुई। लन्दन जाकर उन्होंने बैरिस्टर की पढाई की और वापस आकर अहमदाबाद में वकालत करने लगे। महात्मा गांधी के विचारों से प्रेरित होकर उन्होने भारत के स्वतन्त्रता आन्दोलन में भाग लिया और भारत की अखंडता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई ।

अपने जीवनकाल में उन्होंने कई सत्याग्रहों में भाग लिया जिनमे खेड़ा संघर्ष और बारडोली सत्याग्रह प्रमुख है इन दोनों की सत्याग्रह के दौरान उन्होंने किसानो पर लगाए जाने वाले करो पर छूट के लिए आवाज उठाई जब यह स्वीकार नहीं किया गया तो सरदार पटेल, गांधीजी एवं अन्य लोगों ने किसानों का नेतृत्व किया और उन्हे कर न देने के लिये प्रेरित किया। अन्त में सरकार झुकी और उस वर्ष करों में राहत दी गयी।

SARDARPATELji

सरदार पटेल ने आजादी के ठीक पूर्व ही पीवी मेनन के साथ मिलकर कई देसी राज्यों को भारत में मिलाने के लिये कार्य आरम्भ कर दिया था।पटेल और मेनन ने देसी राजाओं को बहुत समझाया कि उन्हे स्वायत्तता देना सम्भव नहीं होगा। इसके परिणामस्वरूप तीन को छोडकर शेष सभी राजवाडों ने स्वेच्छा से भारत में विलय का प्रस्ताव स्वीकार कर लिया। केवल जम्मू एवं कश्मीर, जूनागढ तथा हैदराबाद के राजाओं ने ऐसा करना नहीं स्वीकारा।

जूनागढ के नवाब के विरुद्ध जब बहुत विरोध हुआ तो वह भागकर पाकिस्तान चला गया और जूनागढ भी भारत में मिल गया। जब हैदराबाद के निजाम ने भारत में विलय का प्रस्ताव अस्वीकार कर दिया तो सरदार पटेल ने वहाँ सेना भेजकर निजाम का आत्मसमर्पण करा लिया। किन्तु नेहरू ने कश्मीर को यह कहकर अपने पास रख लिया कि यह समस्या एक अन्तराष्ट्रीय समस्या है,परिणाम स्वरुप आज तक कश्मीर समस्या का कोई समाधान नहीं मिल पाया है ।

राजनैतिक इतिहास -सरदार पटेल गाँधी जी के विचारो से बहुत प्रभवित थे इसलिए गांधी जी की इच्छा का आदर करते हुए पटेल जी ने प्रधानमंत्री पद की दौड से अपने को दूर रखा और इसके लिये नेहरू का समर्थन किया। उन्हे उपप्रधान मंत्री एवं गृह मंत्री का कार्य सौंपा गया। किन्तु इसके बाद भी नेहरू और पटेल के सम्बन्ध तनावपूर्ण ही रहे। इसके चलते कई अवसरों पर दोनो ने ही अपने पद का त्याग करने की धमकी दे दी थी। सन १९५० में उनका देहान्त हो गया। इसके बाद नेहरू का कांग्रेस के अन्दर बहुत कम विरोध शेष रहा।

स्टैच्यू ऑफ यूनिटी की खासियत-

statue of unity

  • नर्मदा नदी पर बने सरदार सरोवर बांध पर बनी यह मूर्ति सात किलोमीटर दूर से नजर आती है। यह दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा है। इससे पहले चीन की स्प्रिंग बुद्ध सबसे ऊंची प्रतिमा थी। इसकी ऊंचाई 153 मीटर है। इसके बाद जापान में बनी भगवान बुद्ध की प्रतिमा का नंबर आता है जो 120 मीटर ऊंची है। तीसरे नंबर पर न्यूयॉर्क की 93 मीटर ऊंची स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी है।
  • स्टैच्यू ऑफ यूनिटी को सिंधु घाटी सभ्यता की समकालीन कला से बनाया गया है। इसमें चार धातुओं के मिश्रण का इस्तेमाल किया गया है। इससे इसमें बरसों तक जंग नहीं लगेगी। स्टैच्यू में 85% तांबा इस्तेमाल हुआ है।
  • स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के निर्माण में पांच साल का वक्त लगा। सबसे कम समय में बनने वाली यह दुनिया की पहली प्रतिमा है। लागत 2990 करोड़ रुपए है।
  • स्टैच्यू में लगी लिफ्ट से पर्यटक प्रतिमा के हृदय तक जा सकेंगे। यहां से लोग सरदार सरोवर बांध के अलावा नर्मदा के 17 किमी लंबे तट पर फैली फूलों की घाटी का नजारा देख सकेंगे।
  • प्रतिमा में सरदार के चेहरे की बनावट तय करने के लिए दस लोगों की कमेटी बनाई गई थी। सभी की सहमति के बाद 30 फीट का चेहरा बना गया। इसे 3डी तकनीक से तैयार किया गया है।
  • पटेल की प्रतिमा के होंठ, आंखें और जैकेट के बटन 6 फीट के इंसान के कद से बड़े हैं। इसमें 70 फीट लंबे हाथ हैं, पैरों की ऊंचाई 85 फीट से ज्यादा है। इसे बनाने में 3400 मजदूरों और 250 इंजीनियरों ने लगभग 42 महीने काम किया।
  • सरकार स्टैच्यू ऑफ यूनिटी को पश्चिम भारत के सबसे शानदार पर्यटक स्थलों के रूप में विकसित कर रही है। यहां पर्यटकों के आकर्षण के लिए कई और सुविधाएं बनाई जा रही हैं। पर्यटक यहां रुक भी सकेंगे।
  • प्रतिमा स्थल पर लेजर शो चलेगा। पास में ही म्यूजियम, रिसर्च सेंटर और फूड कोर्ट होगा। प्रतिमा पर कमर से ऊपर लेजर शो के जरिए सरदार पटेल की जीवन यात्रा दिखाई जाएगी।
  • सरदार म्यूजियम भी होगा। जहां पटेल से जुड़े 40 हजार दस्तावेज, 2 हजार दुर्लभ फोटो होंगी। नेहरू, अंबेडकर, सरोजिनी नायडू जैसी विभूतियों के संविधान सभा में दिए भाषण के ऑडियो टेप भी म्यूजियम में होंगे।
  • यहां 45 हेक्टेयर में टाइगर सफारी बनाई जाएगी, कच्छ की तर्ज पर 250 रूम की टेंट सिटी बनेगी, इसमें 500 लोग ठहर सकेंगे सरदार सरोवर बांध से 4 किमी दूर साधु बेट में कच्छ के रण की तरह टेंट सिटी बसाई जा रही है।

 

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