वो पहली मुलाकात

प्यार शब्द अपने आप में अनोखा है, कब कैसे किससे और क्यों हो जाए समझ नहीं आता| ठीक वैसे ही जैसे दो दोस्तो को हुआ एक दूसरे से बाते करते हुए उन्हें अंदाजा ही नहीं रहा कब वो इतना करीब आ चुके है।

एहसास तो था कि ये शायद प्यार है पर उसे स्वीकार करने की हिम्मत दोनों में ही ना थी, पर कहते है ना इस प्यार से जितना भागो ये उतना ही अपनी और खींचता है, हुआ भी कुछ यूं ही और फिर तय कि गई पहली मुलाकात की तारीख वैसे ऐसा नहीं था कि ये उनकी पहली ुलाकात थी पर प्यार होने के बाद ये उनकी पहली मुलाकात बनने वाली थी।

प्यार शब्द अपने आप में अनोखा है, कब कैसे किससे और क्यों हो जाए समझ नहीं आता| ठीक वैसे ही जैसे दो दोस्तो को हुआ एक दूसरे से बाते करते हुए उन्हें अंदाजा ही नहीं रहा कब वो इतना करीब आ चुके है

इस भागदौड़ वाले शहर में उन्हें एक ऐसी जगह की तलाश थी जहां वो चिरपरिचत चेहरों से तो दूर हो पर एकांत नहीं शायद इसलिए कि कोई असहज ना हो और इस तरह वो एक नवनिर्मित मॉल में मिले एक दूसरे से नजरें चुराते, हर समय अपनी भावनाओं को नियंत्रित करते की कहीं दूसरा उसकी आंखो में छुपे उस प्यार को देख ना ले । पर प्यार को कोई बांध पाया है बिना कुछ कहे जब लोग एक दूसरे को समझने लगे समझो वही प्यार है।

यहां वहां की बातो के बाद जाने का समय हो गया और ये कोई एक दिन कि दूरी नहीं महीनों की दूरी बनने वाली थी, क्योंकि हमारे हीरो को किसी और शहर में नौकरी जो मिल चुकी थी, जाने से पहले वो जानना चाहता था कि क्या लड़की भी प्यार करती है| उससे हालांकि वो ये बात पहले से जानता था पर फिर भी उसने पूछा “क्या ये प्यार है?” अचानक किए गए इस सवाल का जवाब उसे ना सूझा और जवाब में बस उसने लड़के के हाथो में अपना हाथ रख दिया, और निकलने लगे घर की ओर|

पर कुछ था जो अधूरा था, कुछ कमी थी इस मुलाकात में, अचानक लड़के ने पीछे से हाथ पकड़ा और कहा कि तुम्हे गले लगाना चाहता हूं, ये जरूरी है और इस तरह उसे बाहों में लिया की सालो बाद भी उनका ये सफर जारी है। एक हग ने उस खालीपन को भर दिया, उस प्यार के एहसास को और पक्का कर दिया। इतने सालो में मुलाकाते तो कई हुई पर पहली मुलाकात की बात ही कुछ और होती है जिसने दो लोगो को एक कर दिया।

हां माना जिंदगी में परेशानियां है, बहुत झगड़े भी हुए है, कई बार तो बात रिश्ता ख़तम होने तक भी पहुंची है पर एक प्यार ही तो है ना जिसने अब तक जोड़े रखा है रिश्ता है, तो तकलीफे भी होंगी पर क्या हर बार उस पहली मुलाकात को याद कर फिर से प्यार में खोया नहीं जा सकता।

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