वायु प्रदुषण

बढ़ता वायु प्रदुषण विश्व भर के लिए चिंता का विषय बना हुआ है हर दिन के साथ हालात और ज्यादा बदत्तर हुए जा रहे है हाल ही में एक रिसर्च ने बताया की ओजोन परत पृथ्वी के अस्तित्व को बनाए रखने के लिए खुद प्रयास कर रही पर यहाँ रहने वाले इंसान अब भी इसे लेकर गंभीर नहीं दिखाई देते जैसे जैसे टेक्नोलॉजी अपने आप को विकसित कर रही है पृथ्वी के अस्तित्व पे खतरा मंडराना शुरू हो गया है विश्व की बात छोडे भारत के ही कई महानगरों की स्थिति गंभीर चिंता का विषय है |

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अब आप दिल्ली में फैले स्मोग को ही ले लीजिये दिल्ली और एनसीआर में वायु प्रदूषण से बुरी तरह प्रभावित होने के कारण ३५% निवासियों का कहना है कि केंद्रीय और राज्य सरकारों ने प्रदूषण के खिलाफ कार्य करने की क्षमता छोड़ दी है परिणामस्वरूप वहाँ के नागरिक दिल्ली एनसीआर से बाहर निकलना चाहते हैं |

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हालिया सर्वेक्षण में वहाँ के नागरिको से वहाँ की स्थिति को जानने का प्रयास किया गया और चौकाने वाले परिणाम सामने आए १२% निवासियों का कहना है कि वे जीवित रहेंगे लेकिन प्रदूषण के स्तर अधिक होने पर अस्थायी रूप से दूर जाना चाहते हैं। ५७% निवासियों ने कहा कि प्रदूषण के कारण उन्हें स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ा है कई चिकित्सा विशेषज्ञों ने इस क्षेत्र में निवासियों को इस क्षेत्र में वायु गुणवत्ता को खराब करने के स्वास्थ्य जोखिमों के बारे में चेतावनी दी है विशेष रूप से पीएम २.५ और पीएम १० कणों के हानिकारक प्रभाव जो श्वास के दौरान फेफड़ों में नुकसान पहुंचा सकते हैं। हालत ये है की लोग बिना मास्क के घर से बाहर निकलने में डर  रहे  है |

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सर्वेक्षण में दिल्ली गुड़गांव नोएडा फरीदाबाद और गाजियाबाद में रहने वाले १२ से अधिक नागरिकों ने भाग लिया हालत की गंभीरता तो तब ही समझ आ गई थी जब दिल्ली में भारतीय टीम क्रिकेट मैच खेल रही थी और मास्क पहन के खेलने को मजबूर थी यहाँ तक कई खिलाड़ियों ने तो मैदान में आने तक से इंकार कर दिया था |

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हालाँकि ये सिर्फ दिल्ली वालो के लिए चिंता का विषय नहीं अपितु पुरे मानव समाज के लिए प्रश्न है की आप अपने आपने वाली पीढ़ी को क्या देना चाहते है मास्क पहनने को मजबूर बचपन बीमारिया या एक स्वच्छ वातावरण चुनाव आपका अपना है |