भोपाल द सिटी ऑफ़ लेक

आज बात करते है, भोपाल की जिसे झीलों की नगरी भी कहा जाता है, क्योंकि यहाँ छोटे बड़े कई तालाब है जैसे बड़ा तालाब ,छोटा तालाब, शाहपुरा लेक, मोतिया तालाब | बड़े तालाब का निर्माण आज से करीब १००० साल पहले ११वी शताब्दी में ,परमार वंश के राजा भोज ने करवाया था |किसी कवी की लाइन भी है, भोपाल है ताल तलैयों का हिन्दू मुस्लिम सब भाइयो का ,यहाँ हिन्दू और मुस्लिम दोनों ही धर्मो को मानने वालो की बड़ी तादाद है|

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अचानक हुई एक दुर्घट्ना ने इसे पुरे विश्व में एक अलग पहचान दी , ये बात है १९८४ की जब एक अमेरिकी कंपनी यूनियन कार्बाइड ,से हुए मिथाइल आइसोसाइनेट गैस के रिसाव के कारन करीब २०००० लोग मारे गए जिसका प्रभाव आज भी भूमि प्रदुषण, जल प्रदुषण, और वायु प्रदुषण के रूप में भोपाल वासी झेल रहे है | भोपाल शहर मध्यप्रदेश की राजधानी भी है, जिसे राजा भोज के नाम से भोजताल के नाम से जाना जाता था | परमार राजाओं के अस्त के बाद यह शहर कई बार लूट का शिकार बना। और अफगानी शासक के हाथो में आने के बाद यहाँ मुग़ल संस्कृति का उदय हो जिसका असर आज भी यहाँ देखने को मिलता है इसीलिए इसे नवाबो का शहर भी कहा जाता है |

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  • ऐतिहासिक धरोहर– ऐतिहासिक धरोहर के रूप में भोपाल में भोजपुर मंदिर ,ताजुल मस्जिद  ,भीमबैठिका ,भारत भवन और साँची का स्तूप है, भोजपुर मंदिर जीका निर्माण, परमार वंश के राजा भोजपाल ने ११वी शताब्दी में करवाया था |यहाँ प्रसिद्ध शिवलिंग विराजित है ,इसके बारे में लोकश्रुति है ,की इसका निर्माण एक रात में हुआ है |भीमबैठिका, अगर ाकि रूचि पुरातत्व में है तो ये स्थान आपके लिए ही है | यहाँ की चित्रके १२०० वर्च पुरानी है | साँची का स्तूप बौद्ध धर्म का पवित्र स्थल है ताजुल मस्जिद ह मस्जिद भारत की सबसे विशाल मस्जिदों में एक है। इस मस्जिद का निर्माण कार्य भोपाल के आठवें शासक शाहजहां बेगम के शासन काल में प्रारंभ हुआ था |                                        bpl3
  • पर्यटन स्थल – भोपल में घूमने के लिए बहुत सी अच्छी जगह है | जैसे लक्ष्मीनारायण मंदिर, लेक व्यू ,वनविहार, इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय संग्रहालय, मनुआभान की टेकरी, शाहपुरा लेक, शौर्य स्मारक , लक्ष्मीनारायण मंदिर को बिड़ला मंदिर के नाम से भी जाना जाता है, लक्ष्मी नारायण की आकर्षक प्रतिमा हर हिन्दुओ को अपनी और आकर्षित करती है ,ये अरेरा पहाड़ी पर स्थित है ,यहाँ खड़े होकर पुरे भोपाल का व्यू देखा जा सकता है ,| लेक व्यू बड़े तालाब का किनारा यहाँ घूमने के साथ साथ बोटिंग की सुविधा भी दी जाती है | शौर्य स्मारक इसका उद्घाटन १४ अगस्त २०१६ में हमारे तत्कालीन प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के हाथो किआ गया, मध्यप्रदेश के शौर्य को दिखाता ये स्थल शहीदों के शेहरो से लाइ गई मिटटी से पवित्र है |
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  • रहन सहन- भोपाल में हिन्दू और मुस्लिम दोनों धर्मो को मानने वाले काफी बड़ी संख्या में है ,इसलिए यहाँ मिला जुला रेहान सेहन देखने को मिलता है | जितना उत्साह यहाँ होली और दिवाली में मिलता है, उतना ही उत्साह या ईद के मौके पे भी देखने को मिलता है जिस तरह दिवाली के १५ दिन पहले से यहाँ के बाजार सज जाते है ,उसी तरह रमजान के मौको पे भी रात भर बाजार खुले रहते है, यहाँ दोनों धर्मो का आपसी प्रेम और भाईचारा पुरे देश में मिसाल है |
  • आवागमन- भारत में मध्यभाग में होने के कारन यहाँ आवागम बहुत सरल है, यहाँ वायु मार्ग रेल मार्ग और सड़क मार्ग सभी तरह से पंहुचा जा सकता है ,यातायात के बहुत से साधन आपको यहाँ मिल जाएंगे | अपना स्वयं का वहां न होने पे भी इस जगह पे रहा जा सकता है की यहाँ बस ऑटो कैब आदि सभी सुविधाए मौजूद है साथ ही साथ जल्द ही मेट्रो का कार्य भी प्रस्तावित है |
  • मुग़ल संस्कृति – यहाँ की इमारतों में आज भी मुग़ल संस्कृति की झलक देखने को मिलती है ,चाहे वो भोपाल का ताजमहल हो गौहर महल या शौकत महल |भोपाल के खाने में भी मुगलई स्वाद मिलता है ,चौक मार्किट में मिलने काली रूहअफजा लस्सी हो या इतवारे का मुगलई खाना यहाँ के कमला पार्क में मुग़ल ज़माने का हमाम भी आज तक है जहा शाही स्नान का आनंद लेने वालो की लम्बी लाइन लगी होती है ,भोपाल के नवाबो की वजह से यहाँ मुगल संस्कृति अब तक बानी हुई है|

 

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