भारतीय परम्पराए और उनका वैज्ञानिक महत्व

हमारे देश में बहुत सी परमपरांए सालो से चल रही है |और हमारे पूर्वजो के सिखाए अनुसार हम उन्हें मानते भी आ रहे है |क्या आप जानते है? की ये नियम यु ही नहीं चले आ रहे, इनका वैज्ञानिक कारन भी है | माना जाता है ,हमारे देश की संस्कृति और सभ्यता सबसे पुरानी है | हमारे पूर्वजो ने कुछ नियम बनाए थे ,जिनका पालन आज भी हम लोग कर रहे है | चलिए देखते है ऐसे ही कुछ नियम, और उनका वैज्ञानिक महत्व –

  • उगते सूरज को जल चढ़ाना– हमारे पूर्वजो ने हमे सिखाया है ,की सूर्योदय से पूर्व उठना चाहिए | तथा उगते सूरज को जल चढ़ाना चाहिए, क्योंकि उससे घर में सुख सन्ति और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है | तथा व्यक्ति निरोगी रहता है | किन्तु इसके पीछे वैज्ञानिक मत भी है ,सुर्योदय के समय मिलने वाली आक्सीजन सुधा होती है | जो हमे स्फूर्ति प्रदान करती है सूर्य को जल चढ़ाते वक़्त सूर्य की किरणे जब जल से होती हुई व्यक्ति पे पड़ती है, तो उसकी कफ वात पित्त जैसे रोजो का नाश कर उसे निरोगी बनती है |

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  • माथे पे तिलक लगाना- हमारे यहाँ माथे पे तिलक लगाने का रिवाज है | औरतो में जहाँ इसे सुहाग का प्रतिक माना जाता है, तथा आदमी भी पूजन के बाद तिलक लगते है | इसके पीछे वैज्ञानिक कारण है की माथे पे जिस जगह तिलक लगाया जाता है, वहाँ की नस पे दबाव पड़ने से उसकी यादाश्त तथा एकाग्रता बढ़ती है | स्त्रियां एक समय में कई कार्य करती है, जैसे खाना बनाना साथ ही लोगो की जरूरतों का ख्याल रखना, इसलिए उनका एकाग्र होना बहुत जरुरी है |

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  • हाथ जोड़ के नमस्ते करना- हमारे देश में दोनों हाथ जोड़ कर सामने वाले का अभिवादन किया जाता है| ये हमारी सभ्यता है जो लाखो वर्षो से चली आ रही है | इसके पीछे वैज्ञानिक कारण है, हाथ जोड़ते वक़्त हमारी सारी उंगलिया एक दूसरे से जुड़ कर एक्सूप्रेस्सर का काम करती है, जिससे सामने वाला व्यक्ति हमें लम्बे समय तक याद रहता है |

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  • जमींन पे बैठ कर खाना– हमारे पूर्वजो के समय में डाइनिंग टेबल नहीं हुआ करते थे | खाना सभी एक साथ जमींन पर बैठ कर खाया करते थे, जिससे आपस में प्रेम व् अपनेपन की भावना बानी रहती थी | इसके पीछे वैज्ञानिक कारन है की जब आदमी जमींन पर पालथी मार के बैठता है, जिसे सुखासन मुद्रा भी कहते है, इस तरह बैठ कर खाना खाने से खाने का पाचन आसानी से हो जाता है |

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  • भोजन से पूर्व स्नान– हमारे यहाँ स्नान के पश्चात ही भोजन करने का रिवाज है | धार्मिक मान्यता के अनुसार नहाने से व्यक्ति शारीरिक और मानसिक रूप से शुद्ध हो जाता है | बिना नहाए व्यक्ति अपवित्र होता है ,इसलिए हमारे यहाँ भोजन बनाने और खाने से पूर्व नहाना आवश्यक है |इसके पीछे वैज्ञानिक मत है, की नहाने की बाद शरीर की गन्दगी साफ हो जाती है | तथा हमारे पेट की जठराग्नि तेज हो जाती है ,इसलिए नहाने के बाद खाया गया भोजन आसानी से पच जाता है |

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  • उपवास- हमारी हिन्दू संस्कृति में उपवास का बहुत महत्व है | अपने ईश्वर की आराधना करते हुए व्यक्ति उपवास करता है ,तथा पुरे दिन अनाज न खाकर सिर्फ फलो का सेवन करता है | ऐसा करने के पीछे वैज्ञानिक महत्व भी है, व्रत रखने से तथा पुरे दिन निराहार रहने से हमारी आंतो को आराम मिलता है |तथा उनकी क्रियाशीलता बढ़ती है |

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