मूर्ख स्त्री

प्रेम को अब तक मै जितना समझ पाई हूं, शायद ये एक खूबसूरत अहसास है |

प्यार” शब्द ऐसा शब्द है जिसका नाम सुनकर ही हमें अच्छा महसूस होने लगता है | प्यार शब्द में वो एहसास है जिसे हम कभी नहीं खोना चाहते। इस शब्द में ऐसी पॉजिटिव एनर्जी है जो हमें मानसिक और आंतरिक खुशी प्रदान करती है फिर चाहे वो प्रेम माता पिता का अपने बच्चो से हो दोस्तो में हो या फिर पति पत्नी में।

इस खूबसूरत अहसास का अंदाजा हम एक मां को देख कर लगा सकते है जो अपने बच्चे को तब से प्यार करती है जब से वो उसके गर्भ में आता है | किसी को बिना देखे उसके प्रति पूरी तरह समर्पित ऐसा प्यार तो सिर्फ एक औरत ही कर सकती है।

हां, वही स्त्री जिसे उसके है घर में मूर्ख समझा जाता है वो वाकई में पागल ही तो है जब एक कन्या के रूप में अपने माता पिता के पास रहती है तो पूरी तरह से अपने परिवार को समर्पित रहती है, कदम कदम पर अपनी इच्छाओं की बलि दे देना अपनी जिंदगी किसी और कि शर्तों पर जीना इतना आसान तो नहीं पर माता-पिता की खुशी के लिए वों भी कर जाती है, जब विवाह करके किसी के घर जाती है तो विवाह के समय तो उसे साथ बिठा कर बराबरी का एहसास दिला दिया जाता है और विवाह कि रस्में खत्म होते ही पति के चरण स्पर्श के साथ ही बता दिया जाता हैं यही जगह निर्धारित की है समाज ने तुम्हारे लिए और वो मूर्ख स्त्री इसमें भी अपनी खुशी की कल्पना कर पीछे पीछे चल देती है अपने पति के और घोटती है अपने अरमानों का गला कई बार कभी पत्नी बनकर कभी बहू बनकर ।

क्या कर सकते है मूर्ख है ना आज तक किसी ने एहसास करवाया ही नहीं की उसकी भी इच्छाएं हो सकती है उसकी भी खुशी हो सकती है। पर ये उसका प्रेम है अपने परिवार के प्रति जिस प्रेम में को हर तकलीफ चुपचाप सह जाती है। प्रेम का असली मतलब उसे तब पता चलता है जब वो मां बनती है बिना देखे अपने बच्चे से इतना प्रेम कर पाना शायद एक मां का हृदय ही कर सकता है। जहां वो अपनी जिंदगी के साथ भी समझौता कर जाती है, पर तब भी मूर्ख स्त्री का दर्जा ही पाती है।

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