दिल

दिल, एक अहम एक जरूरी अंग है, जिसका काम खून को शरीर के अलग-अलग हिस्सों में पहुँचाना है। और काश! दिल सिर्फ इतना ही करता, मगर ये बेचारा न जाने क्या-क्या महसूस करता है, सहता है| कितने अहसासों से गुज़रता है, हँसता है रोता है, न जाने कितनी दफे टूटता है फिर जुडता है, दुख-सुख के झूले में झूलता है|

कभी सावन की बारिश से खिल जाता है और कभी आंखो की बारिश से भीतर तक भीग के रह जाता है। कभी-कभी अपना दिल मुझे एक शेल्फ जैसा महसूस होता है। उस पर हम एक के ऊपर एक सब अहसासों को जमा करते चले जाते हैं, और जब एक दिन और जगह नहीं रहती किसी भी भावना के लिए, फिर उस दिन उसमें से कुछ अहसास नीचे जमीन पर गिर कर टूट जाते हैं और फिर हम जमीन पर गिरे टुकडे समेटने लगते हैं।

लेकिन टुकड़े समेटते हुए हम ये भूल जाते हैं कि क्यों इतने बोझ के तले अपने ही दिल को दबा रहे हैं।मगर जैसे जैसे वक्त बीतता है,  हम फिर हिम्मत करके, सब भुला कर, फिर एक बार विश्वास जगा कर, अपने टूटे फूटे दिल को सिल कर, फिर से दिल लगा लेते हैं और उस टूटे दिल को फिर तैयार कर लेते हैं, फिर वो सब महसूस करने के लिए, वो सब झेलने के लिए|

फिर एक बार टूटने के लिए, फिर एक बार चोट खाने के लिए। बेचारा दिल, मेरा छोटा सा, टूटा-फूटा मगर खुबसूरत दिल| कितना कुछ ये सहता है, कोई साथ हो न हो मगर ये, मेरा दिल चाहे जो हो जाए मेरा साथ कभी नहीं छोड़ता|

कहते हैं कि सीने में धड़कता जो हिस्सा है, उसी का तो ये सारा किस्सा है| क्या किया जाए आखिर दिल ही तो है|

Guest post by Pratyaya Singh

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