जाने क्या होता है थाइरॉइड | Know more about Thyroid

हमारा शरीर हमे समय समय पर आने वाली तकलीफो से आगाह करता रहता है और हम जानकारी के आभाव में उसके संकेतो से मुँह मोड़ते रहते है, और स्थिति गंभीर अवस्था में पहुंच जाती है इसलिए आवश्यक है की समय रहते अपने शरीर की बातो को सुना जाए और स्वस्थ रहा जाए,शरीर में ऐसे कई बदलाव होते हैं जिनको हम पहले तो हल्के में लेते हैं और बाद में यह हमारी लिए किसी गंभीर रोग का संकेत निकलते हैं, जैसे थाइरॉइड को ही ले लिया जाए। थायरॉइड की समस्या भी कुछ ऐसी ही है। जो सामान्य शारीरिक समस्या से इस गम्भीर बीमारी तक पहुंचा देती हैं और हम इसे समझ पाए तब तक बहुत देर हो चुकी होती है।  अक्सर थाइरॉइड के लक्षणों को हम शुरुआती दौर में भांप ही नहीं पाते हैं और बाद में इसके लक्षणों की अनदेखी हमें हाइपोथाइरॉइड या हाइपरथाइरॉइड की स्थिति तक पहुंचा देती है।

Thyroid

जाने क्या होता है थाइरॉइड – थाइरॉइड एक तितलीनुमा ग्रंथि होती है जो गले में स्थित होती है थाइरॉइड हमारे शरीर में मौजूद ऐसी ग्रंथि है जो मेटाबॉलिज्म में मदद करती है। इसमें मौजूद हार्मोन टी3, टी4 और टीएसएच का स्तर कम या ज्यादा होने से समस्या होती है। अगर आप इन लक्षणों को महसूस कर रहे हैं तो हो सकता है ये आपके लिए थाइरॉइड की समस्या का संकेत हों, थायराइड तब बढ़ता है जब ये ग्रंथिया जरुरत से ज्यादा हार्मोन रिलीज़ करने लगती है |

थायराइड के प्रकार- थायराइड दो प्रकार के होते है:

१- हाइपो थायराइड – जब सामान्य भोजन के बाद भी वजन अनावश्यक रूप से बढ़ता है या शरीर में सुस्ती आ जाना थकान होना हाइपो थायराइड के लक्षण हैं।

२- हाइपर थायराइड – जब आप भोजन ज़रुरत से ज़्यादा या सामान्य से कम करते हैं। भूख में अचानक परिवर्तन, चाहे आप जितना भी ज़्यादा भोजन ग्रहण करें आप दुबले पतले बने रहते हैं यदि आप वज़न बढ़ाने की कोशिश कर रहें होंरात को सोने में कठिनाई,आपको असामान्य रूप से पसीना आता हो आप छोटी छोटी चीज़ों से तनाव, हड़बड़ाहट एवं जल्दबाज़ी में रहते हैं।

थाइराइड के लक्षण- आमतौर पर थायराइड के लक्षण तब तक पहचान नहीं आते जब तक स्थिति थोड़ी गंभीर न हो जाए, किन्तु अगर आप अपने शरीर में होने वाले छोटे छोटे बदलावों पर ध्यान दे तो शुरुवात में ही थायराइड का पता लगा सकते है, आज बात करते है ऐसे ही कुछ लक्षणों की –

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  • थकान-थायराइड का सबसे मुख्य लक्षण है थकान , थकान होने का सबसे मुख्य कारन है शरीर में ऊर्जा का न बन पाना शरीर में ऊर्जा ना बनने का कारण थायराइड ग्रंथि के हार्मोन ना बनने से होता है।थायराइड से पीड़ित व्यक्ति हमेशा खुद को थका हुआ व सुस्त महसूस करता है |
  • जोड़ों में दर्द -थकान के साथ ही थायराइड के रोगियों को जोड़ों जैसे घुटनों, कमर, गर्दन में दर्द रहने लगता है। इन्हें शारीरिक के साथ साथ मानसिक समस्यायें भी उत्पन्न होने लगती है। जिनकी वजह से व्यक्ति तनाव की स्थिति में भी पहुँच जाता है कई स्थितियों में हड्डियों के टूटने जैसी स्थिति भी उत्पन्न हो जाती है |
  • हेयर फॉल होना-थायराइड के खास सिम्पटम्स में से एक है हेयर फॉल होना, इस रोग में इन्हें गंजेपन तक का खतरा रहता है। इसके अलावा उनके भौहों के बाल तक झड़ने लगते है। ये स्थिति गंभीर अवस्था तक पहुँच जाती है। जब आपको अपने घर पर जगह जगह टूटे हुए बालो के गुच्छे दिखाई देने लगे तो ऐसी स्थिति को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए |
  • डिप्रेशन -क्योकि थायराइड की समस्या के कारण मन में चिंता और तनाव का अहम होता है तो चिंता की वजह से उत्पन्न होने वाले अन्य सबसे बड़े रोग डिप्रेशन का होना भी इसका एक लक्षण होता है। इस स्थिति में व्यक्ति का ना तो किसी कार्य में मन लगता है और ना ही उसका किसी से बात ही करने का मन करता है। साथ ही दिमाग पर अधिक दबाव डालने से उसकी सोचने समझने और याददाश्त की क्षमता में भी कमी आ जाती है पीड़ित व्यक्ति छोटी छोटी बाते भूलने लगता है कुछ समय पहले की ही बात उसे याद नहीं रहती और वक़्त रहते ईलाज न करवाया जाए तो याददास्त हमेशा के लिए चले जाने का भी भय रहता है |
  • प्रतिरोधक क्षमता में कमी आना– थायरॉइड समस्या में व्यक्ति के शरीर के वाइट ब्लड सेल्स के कम होने की भी संभावना होती है। जिससे इनके शरीर को अन्य बीमारियों से संक्रमण का भी खतरा बना रहता है। साथ ही इम्यून सिस्टम के कमजोर होने की वजह से इनकी रोगों से लड़ने की क्षमता पर भी प्रभाव पड़ता है इसलिए थायराइड से पीड़ित व्यक्ति को बार बार बीमार होने वाली समस्याओ का सामना भी करना पड़ता है |

थायराइड में किए जाने वाले आसन–  शारीरिक गतिविधियों में बढ़ोतरी करके तथा खानपान में उचित बदलाव लाकर थायराइड को नियंत्रित किया जा सकता है, ऐसे ही कुछ आसन निम्न है-

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  • सर्वांगासन- यह आसन इस स्थिति में सर्वाधिक उपयोगी माना जाता है। इस आसन से पड़ने वाले दबाव थाइरोइड ग्रंथियों को सुचारू रूप से कार्य करने के लिए प्रोत्साहित करता है और दिमाग में पाये जाने वाली ग्रंथियों को भी सही तरीके से कार्य करने में सहायता करता है, जैसे कि पीयूष (पिट्यूटरी) व शीर्ष (पीनियल) ग्रन्थियां जिनका प्रभाव थाइरोइड ग्रंथियों पर नियंत्रण पाने में होता है।अन्य उपयोगी आसान हैं।
  • विपरीतकर्णी
  • जनु शीर्षासन
  • मत्स्यासन
  • हलासन
  • मर्जरीआसान
  • तेज़ गति से सूर्य नमस्कार करने से वज़न नियंत्रित किया जा सकता है।
  • सेतुबंध
  • मर्जरीआसान
  • शिशुआसन
  • शवासन

इन आसनों के अतिरिक्त प्राणायाम अभ्यास (सांस लेने की तकनीक), जैसे कपाल भाती, नाड़ी शोधन, भस्त्रिका ऐवम उज्जयी श्वास भी थायराइड के लक्षणों को नियंत्रण में रखने की मदद करते हैं।

थायराइड की स्थिति में भोजन में बदलाव –

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  • अपने भोजन में उच्च रेशे वाला भोजन सम्मिलित करें।
  • भोजन में वसा एवं कार्बोहाइड्रेट की मात्रा कम करें।
  • ताज़े फल और हरी पत्तेदार सब्ज़ियों का सेवन करें, फूलगोभी, पत्तागोभी एवं ब्रोक्कोली का सेवन हाइपो थाइरोइड में कम से कम करें।
  • मांसाहारी भोजन, दूध एवं दूध से बने पदार्थ (वसा रहित दूध की सलाह दी जाती है), चावल, मसालेदार भोजन, शोधित, फ़ास्ट फ़ूड (संरक्षत पदार्थ) से युक्त भोजन के उपयोग की मात्रा सीमित करें ।

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