जानिए जीवित्पुत्रिका व्रत और उसकी कथा

ये व्रत मुख्यतः उत्तर भारत में मनाया जाने वाला पर्व है जो की आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अष्ठमी को मनाया जाता है इसमें घर की महिलाए पुरे दिन का निर्जला व्रत रखती है ये व्रत अपने पति व् अपनी संतान की लम्बी आयु के लिए रखा जाता है |

व्रत की विधि- आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अष्ठमी जो सप्तमी रहित हो अर्थात पुरे दिन की अष्ठमी में व्रत रखकर नवमी पको पारण किया जाता है ,व्रत रखने वाली महिला को प्रातः जल्दी उठकर स्नानादि कर्म से निवृत होकर एक आसान पर जीमूत वाहन की कुश की आकृति बना कर उसका विधि विधान से पूजन किया जाता है और जिउतिया (धागे से बना एक आभूषण जिसमे सोने अथवा चांदी से बना जिउतिया लगा हो )को रख कर अपने पति और संतान की लम्बी आयु के लिए पुरे दिन का निर्जला व्रत रखा जाता है तथा शाम को व्रत की कथा सुनने के पश्चात् जिउतिया अपने बच्चो या पति के गले में डालके स्वयं पहने जाने का रिवाज है | अगले दिन अर्थात नवमी के दिन इसका पारण किया जातः है जिसमे दही बड़े, भजिये, कढ़ी आदि बनाने का रिवाज है इस दिन बासा खाने की शख्त मनाही है |

व्रत की कथा- गन्धर्वराज जीमूतवाहन बड़े धर्मात्मा और त्यागी पुरुष थे। युवाकाल में ही राजपाट छोड़कर वन में पिता की सेवा करने चले गए थे। एक दिन भ्रमण करते हुए उन्हें माता मिली, जब जीमूतवाहन ने उनके विलाप करने का कारण पूछा तो उन्होंने बताया कि  गरुड़ से काफी परेशान है हर दिन गरुण आकर गांव के किसी न किसी व्यक्ति को खा जाया करता था  इस प्रक्रिया में आज उसके पुत्र को गरुड़ के सामने जाना है। माता की पूरी बात सुनकर जीमूतवाहन ने उन्हें वचन दिया कि वे उनके पुत्र को कुछ नहीं होने देंगे और उसकी जगह वो खुद गरुड़ के सामने उपस्थित हो गए जब गरुण ने उनका बांया अंग खा लिया तो तुरंत राजा ने अपना दांया अंग प्रस्तुत कर दिया। ये देख गरुण ने राजा से पूछा की आप कौन है तब राजा ने बताया की वो सूर्यवंश के राजा जीमूतवाहन है उनके त्याग भावना से प्रसन होकर गरुण ने कहा की मई आपकी त्याग भावना से अत्यंत प्रभवित हुआ  हु अतः कोई वर मांगों राजा ने कहा की आप यहाँ की जनता को और अधिक परेशान न करते हुए यहाँ से चले जाए तब गरुण ने राजा को वरदान दिया की वो वह से चले जाएंगे और साथ ही साथ उन्होंने जीमूतवाहन को भी वरदान दिया की तुम्हारा शरीर निरोग रहने के साथ तुम कई वर्षो तक जीवित रहोगे और आज के दिन जो कोई भी तुम्हारा पूजन व व्रत करेगा वो लम्बी आयु प्राप्त करेगा |

जीमूतवाहन

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