जगन्नाथ धाम

भारत में चारो धाम की यात्रा का विशेष महत्व है | हिन्दुओ की आस्था का प्रतिक ये चार धाम भगवान् विष्णु का स्थान माना जाता है , उत्तर में बद्रीनाथ धाम , पूरब में जगन्नाथ धाम , पश्चिम में द्वारका धाम  और दक्षिण में रामेश्वरम हिन्दुओ के बीच गहरी आस्था का केंद्र है | कहा जाता है जब विष्णु भगवान अपनी यात्रा पर निकलते है तो हिमालय के बद्रीनाथ धाम में स्नान करते है, द्वारका में वस्त्र बदलते है, पूरी में भोजन करते है तथा दक्षिण रामेश्वरम धाम में विश्राम करते है |

हिन्दुओं की प्राचीन और पवित्र ७ नगरियों में पुरी उड़ीसा राज्य के समुद्री तट पर बसा है। जगन्नाथ मंदिर विष्णु के ८वें अवतार श्रीकृष्ण को समर्पित है। यहाँ भगवन श्री कृष्णा अपने भाई बलदेव और बहिन सुभद्रा के साथ विराजमान यहाँ वर्ष में एक बार होने वाली जगन्नाथ रथ यात्रा को देखने के लिए श्रद्धालु दूर दूर से यहाँ एकत्रित होते है |

इस मंदिर का सबसे पहला प्रमाण महाभारत के वनपर्व में मिलता है। कहा जाता है कि सबसे पहले सबर आदिवासी विश्‍ववसु ने नीलमाधव के रूप में इनकी पूजा की थी। आज भी पुरी के मंदिरों में कई सेवक हैं जिन्हें दैतापति के नाम से जाना जाता है। अपने इतिहास के साथ साथ यहाँ होने वाले चमत्कारों ने इसकी महानता को और बढ़ा दिआ है|

जगन्नाथ धाम के चमत्कार 

  1. मंदिर के ऊपर लगा लाल ध्वज हमेशा हवा के विपरीत लहराता है , ऐसा क्यू है ये तो वैज्ञानिको के लिए भी आश्चर्य का विषय बना हुआ है |
  2. यह भी आश्‍चर्य है कि प्रतिदिन सायंकाल मंदिर के ऊपर स्थापित ध्वज को मानव द्वारा उल्टा चढ़कर बदला जाता है। ध्वज भी इतना भव्य है कि जब यह लहराता है तो इसे सब देखते ही रह जाते हैं। ध्वज पर शिव का चंद्र बना हुआ है।
  3. यह दुनिआ का सबसे ऊँचा मंदिर है जो लगभग ४ लाख वर्गफुट में फैला है तथा इसकी ऊंचाई २१४ वर्गफुट है इसके बाद भी दिन के किसी भी समय चले जाओ इसके गुम्बद की छाया नहीं बनती जो अपने आप में एक चमत्कार है|
  4. पुरी में मंदिर के शीर्ष पर लगा सुदर्शन चक्र जब भी देखे तो वह आपको सदैव अपने सामने ही लगा दिखेगा। इसे नीलचक्र भी कहते हैं। यह अष्टधातु से निर्मित है और अति पावन और पवित्र माना जाता है।
  5. सामान्य दिनों के समय हवा समुद्र से जमीन की तरफ आती है और शाम के दौरान इसके विपरीत लेकिन पुरी में इसका उल्टा होता है।
  6. इस मंदिर के ऊपर से कभी न ही कोई विमान गुजरता है न ही कोई पक्षी ऐसा क्यों है ये कह पाना मुश्किल है|
  7. दुनिआ का सबसे बड़ा रसोईघर यही है यहाँ २० लाख लोग एकसाथ भोजन कर सकते है कहा जाता है की प्रसाद भले ही हजारो लोगो के लिए बना हो पर लाखो लोगो में भी कभी काम नहीं पड़ता और सबसे खास बात है की यहाँ बनाया जाने वाला प्रसाद एक के ऊपर एक सात पतीले रख कर बनाया जाता है और आश्चर्य की बात ये है की सबसे पहले सबसे ऊपर रखे बर्तन का खाना पकता है|

8. मंदिर के सिंहद्वार में पहला कदम प्रवेश करने पर ही (मंदिर के अंदर से) आप सागर द्वारा निर्मित किसी भी ध्वनि को नहीं सुन सकते। आप (मंदिर के बाहर से) एक ही कदम को पार करें, तब आप इसे सुन सकते हैं। इसे शाम को स्पष्ट रूप से अनुभव किया जा सकता है।

इस मंदिर में गैर-भारतीय धर्म के लोगों का प्रवेश प्रतिबंधित है। माना जाता है कि ये प्रतिबंध कई विदेशियों द्वारा मंदिर और निकटवर्ती क्षेत्रों में घुसपैठ और हमलों के कारण लगाए गए हैं।

Leave a Reply