कोरोना त्रासदी

इस कोरोना काल ने हमे कई तरह के सवालों और विचारों से रूबरू करवाया या ये कहे ये मानव जाति की आंखे खोलने को ही आया था। इस कठिन समय में हमने इंसानों के कई रूप देखे कुछ में मानवता की हद देखने को मिली कही ये भी देखने को मिला की अपनी स्वार्थ सिद्धि के लिए लोग किस हद तक इंसानियत भूल सकते है। अमीर हो या गरीब सब को एक जगह ला कर खड़ा कर दिया।

इंसानों ने सबक सीखा की पैसा जिंदगी से ज्यादा अनमोल नही है एक छोटे से वायरस ने ऐसा विकराल रूप दिखाया की न सिर्फ भारत में अपितु सम्पूर्ण मानव समाज को कैद कर के रख दिया जिस भागदौड़ भरी जिंदगी में लोगो को बैठने की चैन से सांस लेने की फुरसत नंही थी वहां लोग महीनो घर में कैद होने को मजबूर होना पड़ा। यही वो वक्त था जब लोगो को समझ आया की भागदौड़ में उन्होंने जिंदगी को कितना पीछे छोड़ दिया था। लोगो ने समझा की परिवार और रिश्ते पैसों से कहीं ज्यादा अहम है।

माना कि कई लोगो ने इस महामारी के दौर में अपने अपनो को खोया है पर एक बहुत बड़ी संख्या में रिश्तों ने नया जन्म भी पाया है । जिस तरह लोगो ने इस कठिन समय में परस्पर सहयोग दिखाया है ये साबित करता है की लोगो में आज भी इंसानियत जिंदा है तभी तो इतना कठिन दौर हम पार कर पा रहे है। लाखों की नौकरियां चली गई गरीब वर्ग सड़को पर आ गया पर ऐसे समय में कुछ लोग फरिश्तों की तरह उनके जीवन में आए ऐसा ही बहुत बड़ा नाम हम जानते है सोनू सूद के रूप में ऐसे कठिन समय में जिस तरह उन्होंने मानवता की मिशाल पेश की है की हर भारतीय न सिर्फ उनका प्रशंसक है बल्कि एक बहुत बड़ा वर्ग उनका ऋणी है चाहे वो मजदूरों को सलामत रूप से घर पहुंचाना हो, गरीबों को अनाज उपलब्ध करवाना हो नौकरी दिलवाना हो और अब तो ऑक्सीजन और बेड की जरूरतों को पूरा करने का काम हो। वो बंदा हर जगह पीछे नही हटा और हर संभव प्रयास किया मदद पहुंचाने को ठीक उन्हीं की तरह हर शहरो मे लोगो ने तथा कई समाजिक संगठनों ने आगे आकर ना सिर्फ लोगो का हौसला बढ़ाया मदद के लिए प्रेरित किया बल्कि जान की परवाह किए बिना लोगो की मदद को आगे आए यह ये दर्शाता है की लोगो में आज भी इंसानियत जिंदा है।

वही दूसरी और ऐसे लोग भी है जिन्होंने मानवता को शर्मशार करने में कोई कसर नही छोड़ी मौके का फायदा उठाया अनाज से लेकर दैनिक जरूरत की चीजे हो या दवा से लेकर ऑक्सिजन लोगो ने कालाबाजारी करने में कोई कसर नही छोड़ी मैं समझ भी नंही पाती किस तरह के लोग है ये इनमे इंसानियत नाम मात्र भी नही जहां एक और मौत तांडव कर रही है इस तरह की मुनाफाखोरी और कालाबाजारी उन्हें सोने कैसे देती है।मौत के आंकड़े डराने वाले है रोज हजारों की मौत की खबर मन विचलित कर देती है और ये किस तरह के लोग है जिन्होंने मौत को भी व्यापार बना दिया। ये माहोल देख कर भी जो नहीं सीख पाया।

इसलिए ही कहा गया है प्रकृति से छेड़छाड़ न करो कल जब पानी के पैसे चुका रहे थे सब ठीक था आज सांसे भी खरीदनी पड़ रही है ये कैसा समय आ गया है अब भी लोग नहीं समझे तो आने वाले समय में इसकी बड़ी कीमत चुकानी पड़ेगी।

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