कहानी हमारे व्हाट्स ऐप की-

व्हाट्स ऐप की कहानी उन प्रेरणादाई कहानियो में से एक है, जो व्यक्ति को आगे बढ़ने का रास्ता दिखाती है | ये कहानी एक व्यक्ति को जीवन में मिली असफलता से सफलता की कोशिशों को दिखाती है, आज के समय में शायद ही कोई ऐसा हो जिसके पास स्मार्टफोन ना हो, और जिस किसी के पास स्मार्ट फ़ोन है उसके फ़ोन में व्हाट्स ऐप भी है | ये आज सबसे ज्यादा यूज़ किया जाने वाला मैसेंजर बन चूका है, ये कहानी उन लोगो के लिए है जो जीवन में हार मान चुके है ,इसे पढ़के वो जान जाएंगे की अगर “कोई व्यक्ति किसी लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए निरंतर प्रयास करता रहता है उसे एक न एक दिन सफलता जरूर मिलती है”|

 


व्हाट्स ऐप की शुरुआत – इसकी शुरुआत दो दोस्तों ब्रायन ऐक्टन और जेन कौम ने मिलकर २००९ में की थी | ब्रायन ऐक्टन तब याहू में बतौर इंजीनियर काम करते थे और जेन कौम वो वो नामक ग्रुप में बतौर हैकर काम किया करते थे | याहू के ऑफिस में ही दोनों की पहली मुलाकात हुई उन दोनों का ही टेक्नोलॉजी में अच्छा ज्ञान होने के काऱण वे दोनों अच्छे दोस्त बन गए | १० साल काम करने के बाद उन दोनों ने याहू से नौकरी छोड़ने का निर्णय लिया | २००७ में दोनों ने याहू की नौकरी छोड़ दी और खुद के बल पर कुछ नया करने में लग गए।

व्हाट्स ऐप बनाने का आईडिया जेन कौम को पहले आया जब वो टीवी देख रहे थे। वो सोचने लगे की क्यों ना एक ऐसा ऐप बनाया जाए जिसकी मदद से अपने दोस्तों को आसानी से कोई खबर पहुंचाई जा सके। साथ ही उसमें कोई खर्च भी ना हो। यह आईडिया जब कौम ने ऐक्टन को बताया तो ऐक्टन को कुछ दिनों तक यह आईडिया उतना अच्छा नहीं लगा पर वो बाद में मान गए और जी जान से ऐप बनाने में लग गए |  प्रोग्रामिंग का अच्छा नॉलेज होने के कारन दोनों ने ऐप बना भी ली |

शुरुआत के समय उन्हें बहुत सारी मुश्किलों का सामना करना पड़ा था। उन्हें इसके लिए  बहुत खर्च भी  करना पड़ा था। पहले व्हाट्स ऐप को जब यूजर सबसे पहले इनस्टॉल करने के बाद जो फ़ोन्स में ओ.टी.पी जाते थे, कौम के बैंक अकाउंट से वो पैसे कटते थे। कई बार व्हाट्स ऐप के मैसेज सर्वर तक न पहुंचने जैसी कठिनाइयों को देखते हुए कौम ने ऐक्टन से ये प्रोजेक्ट छोड़ किसी और प्रोजेक्ट में काम करने को भी कहा, पर ऐकटन ने उन्हें समझाया व्हाट्सप्प छोड़ना उनके जीवन की बड़ी गलती हो सकती है | और फिर दोनों दुगनी ताक़त से व्हाट्सप्प डेवलपमेंट में लग गए|


• परेशानिया – व्हाट्सप्प को आगे ले जाने में उनके सारे पैसे खर्च हो गए और पैसो के इंतजाम के लिए उन्होंने दोबारा नौकरी करने का निर्णय लिया , सबसे पहले वे फेसबुक के ऑफिस गए जहाँ उन्हें रिजेक्ट कर दिया गया | उसके बाद उन्होंने ट्विटर और कई बड़ी कंपनियों में भी अप्लाई किया पर कहीं बात नहीं बनी, साथ ही पैसो की कमी की वजह से व्हाट्सप्प का काम भी ठीक से नहीं हो रहा था | तब उन्होंने दोस्तों से मदद मांगने का निर्णय लिया, अपने सभी पुराने दोस्तों से बात की और उन्हें अपने प्रोजेक्ट और पैसो की जरुरत के बारे में बताया , दोस्तों की मदद के साथ वे दोनों व्हाट्सप्प को सफलता पूर्वक बनाने में कामयाब हुए |


• परिणाम- अंततः वो सफल हुए व्हाट्सप्प वर्ष २०१० से २०१४ तक पुरे विश्व में फ़ैल गया | २०१४ के अंत तक व्हाट्सप्प यूजर की गिनती ६० करोड़ से ज्यादा हो गई थी | उसके बाद व्हाट्सप्प ने कभी पीछे मुड़के नहीं देखा, व्हाट्सप्प इतनी तेजी से आगे बढ़ रहा था की हर महीने औसतन २. ५ करोड़ लोग व्हाट्सप्प से जुड़ रहे थे | वर्ष २०१४ में जिस कंपनी फेसबुक ने उन्हें नौकरी देने से इंकार किया था, उसी ने इसे १ लाख करोड़ से भी ज्यादा में खरीदा |

आज दोनों ब्रायन ऐक्टन और जेन कौम उसी नौकरी के लिए मना कर देने वाली कंपनी के शेयर होल्डर हैं। आज भी पुरे विश्व में व्हाट्सप्प के ही सबसे ज्यादा एक्टिव यूजर हैं और दुसरे सभी मैसेंजर ऐप को यह ऐप पीछे कर चूका है।

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