कदर और प्रोत्साहन

गोपाल सिंह एक गस्सैल आदमी था। वह अपनी पत्नी से बुरा बतार्व करता था। उसकी पत्नी राधा
घर का हर काम मन लगाकर करती थी । गोपाल सिंह उसके बनाये हुए भोजन और घर के हर काम
में नुक्स नकलता रहता और बरा भला कहता। राधा यह सबकुछ सनु लेती और सहन कर लेती थी।

एक दिन राधा ने सोचा की वह गोपाल सिंह को सबक सखाएँगी। राधा ने कहा की वह अब कुछ
दिन के लिए माईके में रहेगी। गोपाल सिंह ने मन मारकर उसे इज़्ज़ाज़त दे दी । गोपाल सिंह ने कहा
-“कितने दिन में लौट आओगी ?
राधा ने कहा -“सात दिन”
यह सनकर गोपाल सिंह को बेहद चिंता हुई । उसने सोचा की घर के इतने सारे काम वह अकेले कैसे
संभाल पायेगा?

पत्नी के जाते ही दो दिन में गोपाल सिंह को अपनी गलती का एहसास होने लगा।
वह मन ही मन पछताने लगा की उसने अपनी बीवी के काम की कदर नहीं की । गोपाल सिंह तीन
दिन बाद अपने पत्नी को लेने माईके आ गए। उसने अपनी पत्नी से माफ़ी मांगीं । गोपाल सिंह को
इस बात का एहसास हुआ की उसे दूसरो के काम की इज़्ज़त करनी चाहिए और कोशिशो की तारीफ करनी चाहिए ।

अंत में हमने यह सीखा जिसका काम उसी को साजे। जो जिस काम में माहिर है उसे हमेशा हमें
प्रोत्साहित तथा उसके काम की कदर करना चाहिए ।

लघुकथा – रीमा बोस के द्वारा

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