आश्चर्यजनक तथ्य जिनका वैज्ञानिको के पास भी कोई जवाब नहीं

दुनिया में कई ऐसी चीजे है ,जिनका होना आम आदमी के साथ साथ वैज्ञानिको के लिए भी रहस्य बना हुआ है | कई दशकों के प्रयास के बाद भी, वैज्ञानिक आज तक इन तथ्यों के बारे में पता लगाने में असमर्थ है | कई वैज्ञानिको ने इस क्षेत्र में अथक प्रयास किए, किन्तु कोई परिणाम प्राप्त करने में असमर्थ साबित हुए | चलिए आज बात करते है, ऐसे ही कुछ रहस्यमई चीजों के बारे में –

  • बरमूडा ट्राइएंगल- बरमूडा ट्राइएंगल, अमेरिका के दक्षिण पूर्वी तट पे अमेरिका के फ्लोरिडा प्यूर्टोरिको और बरमूडा तीनों को जोड़ने वाला एक ट्रायंगल यानी त्रिकोण है | इसका रहस्य आजतक वैज्ञानिक भी नहीं खोज पाए | इस जगह अगर गलती से कोई जहाज या हेलीकॉप्टर गुजरे तो वो गायब हो जाता है| और कहा जाता है, कैसे जाता है ,ये आज तक रहस्य है |कौनसी ताक़त इसे अपनी और खींचती है ,इसका पता लगाने में वैज्ञानिक भी असमर्थ है | मैरी सेलेस्टी, एलिन ऑस्टिन, अमेरिका के लेफ्टिनेंट कमांडर जी डब्ल्यू वर्ली ३०९ क्रू सदस्यों के साथ यूएसएस साइक्लोप्स, ऐसे ही कुछ जहाज है जो यहाँ आके अपने क्रू मेंबर के साथ गायब हुए है | शुरू में यह माना गया कि जहाज समुद्री डाकुओं द्वारा लूट लिया गया होगा। लेकिन जहाज पर कीमती सामानों के सुरक्षित होने से डाकुओं द्वारा जहाज को लूट लिए जाने की बात साबित नहीं हो सकी। कई शोध और अध्ययन हुए लेकिन कुछ पता नहीं चल पाया। शुरुआती शोध के परिणाम बताते हैं कि बरमूडा ट्राएंगल के पास एक विशेष प्रकार का कोहरा छाया रहता है जिसमें जहाज भटक जाते हैं। दूसरा कारण यह बताया जाता है कि इस क्षेत्र में मीथेन गैसों का भंडार है। इससे पानी का घनत्व कम हो जाता है और जहाज धीरे-धीरे पानी में समाने लगता है।अफवाहें तो यह भी हैं कि इस क्षेत्र में एलियन्सहै, इसलिए इस तरह की घटनाओं को वह अंजाम देते हैं |

 

  • एलियन- जैसा की वैज्ञानिक मानते है की जिस तरह हमारी पृथ्वी है ,जो की विशाल तारामंडल का एक छोटा सा गृह है | उसी तरह और भी गृह ऐसे है ,जिनमे जीवन की संभावनाए है | हमारी पृथ्वी की तरह दूसरे ग्रहो में भी लोग रहते है, वैज्ञानिक अन्य ग्रहो में रहने वाले एलियन से बात करने का दवा भी करते है | कई स्थानीय नागरिको ने “यु ऍफ़ ओं ” जैसी चीजों के देखे जाने का भी दावा किआ है| पर आधिकारिक रूप से किसी ने एलियन का होना स्वीकार नहीं किआ | एलियन का होना ,उनका देखा जाना, उनसे बात किआ जाना आज तक रहस्य बना हुआ है | एक सिद्धांतकार ने दावा किया है कि नासा के अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष केंद्र से आ रही लाइव स्ट्रीमिंग में पृथ्वी के आसपास सात यूएफओ (अझात उड़न तश्तरी) को चक्कर लगाते हुए देखा गया है।

 

  • ज्वालादेवी मंदिर- ज्वालादेवी मंदिर हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा से ३० किलो मीटर दूर स्तिथ है | इसकी गिनती माता के प्रमुख शक्ति पीठों में होती है। मान्यता है यहाँ देवी सती की जीभ गिरी थी। यह मंदिर माता के अन्य मंदिरों की तुलना में अनोखा है क्योंकि यहाँ पर किसी मूर्ति की पूजा नहीं होती है , बल्कि पृथ्वी के गर्भ से निकल रही नौ ज्वालाओं की पूजा होती है। यहाँ पृथ्वी से अलग अलग नौ ज्वाले निकल रही है जिसके ऊपर ही मंदिर बना दिया गया हैं। इन नौ ज्योतियां को महाकाली, अन्नपूर्णा ,चंडी ,हिंगलाज, विंध्यावासनी, महालक्ष्मी, सरस्वती,अम्बिका, अंजीदेवी के नाम से जाना जाता है। ये ज्वालाएँ कहा से आ रही है, कैसे आ रही है ,वैज्ञानिक भी इसका पता नहीं लगा पाए | यहाँ तक की बुझाने  पर भी ये ज्वाले बुझती नहीं है | गर्भ से इस तरह की ज्वाला निकलना  वैसे कोई आश्चर्य की बात नहीं है ,क्योंकि पृथ्वी की अंदरूनी हलचल के कारण पूरी दुनिया में कहीं ज्वाला, कहीं गरम पानी, निकलता रहता है।लेकिन यहाँ पर ज्वाला प्राकर्तिक न होकर चमत्कारिक है | क्योंकि अंग्रेजी काल में अंग्रेजों ने अपनी तरफ से पूरा जोर लगा दिया, कि जमीन के अन्दर से निकलती ‘ऊर्जा’ का इस्तेमाल किया जाए। लेकिन लाख कोशिश करने पर भी वे इस ‘ऊर्जा’ को नहीं ढूंढ पाए। वही अकबर लाख कोशिशों के बाद भी इसे बुझा न पाए। यह दोनों बाते यह सिद्ध करती है की यहां ज्वाला चमत्कारी रूप से ही निकलती है ना कि प्राकृतिक रूप से, नहीं तो आज यहां मंदिर की जगह मशीनें लगी होतीं और बिजली का उत्पादन होता।

 

  • बटर बॉल- चेन्नई से कुछ दूरी पर ,महाबलीपुरम नामक एक स्थान है | जो दक्षिण समुद्र तट पर स्थित है, यहाँ पर एक विशालकाय पत्थर है ,जिसे “बटर बॉल “के नाम से जाना जाता है |लोकश्रुति के अनुसार ये श्री कृष्णा जी के हाथो से गिरा माखन है जो स्वर्ग से गिरा है | २.२६ लाख किलो के इस पत्थर को आज तक कोई भी नहीं हिला सका है। कहते हैं कि यह पत्थर इस ढलान पर १३०० साल से पड़ा है।१९०८ में चेन्नई (मद्रास) के राज्यपाल आर्थर लाली ने इस पत्थर को खिसकाने की कोशिश की लेकिन पत्थर जस का तस ही रहा। यही नहीं पत्थर खिसकाने के लिए सात हाथियों का प्रयोग किया गया था। हाथियों की लगातार कोशिश के बाद भी पत्थर वहीं खड़ा रहा। पहाड़ी की ४ फ़ीट की सतह पे टिका ये विशालकाय पत्थर ,भौतिक शास्त्र के गुरुत्वाकर्षण के नियम को चुनौती देता हुआ आज भी टिका हुआ है |

 

  • रेसट्रैक प्लाया- रेसट्रैक प्लाया कैलिफोर्निआ के डेथ वैली में स्थित है |डेथ वैली के नाम से जाने वाली ये जगह एक सूखा मरुस्थल है| जहा सैकड़ो पत्थर मौजूद है ,ऐसे सूखे मरुस्थल में इतने बड़े बड़े पत्थरो का पाया जाना अपने आप में एक रहस्य है | कुछ पत्थर वहां इस तरह मौजूद है, जैसे वो घिसटते हुए आगे बढे हो उनके पीछे लम्बी लकीर मौजूद है | यहाँ किसी इंसान या जानवर के इन पत्थरो को घसीटने के सबूत नजर नहीं आते , क्योंकि वहां मौजूद मिटटी बिना किसी छेड़छाड़ दिखाई देती है | कुछ लोगो का मानना है, इस तरह पत्थर का खिसकना,तूफान या प्राकृतिक घटनाओ का संकेत हो सकता है | इस तरह पत्थरो का रेखा बनाते हुए, खिसकना अपने आप में एक अनसुलझा रहस्य है |

 

7 comments

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